रणथंभौर: बाघिन शक्ति ने मगरमच्छ का शिकार कर ताजा की 'मछली' की यादें
सवाई माधोपुर के जोन नंबर 4 में बाघिन टी-111 ने 10 मिनट के संघर्ष के बाद मगरमच्छ को मारा, पर्यटकों ने जामुन देह क्षेत्र में देखा दुर्लभ नजारा।

राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में रविवार सुबह एक ऐसा दुर्लभ और रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने पर्यटकों को रोमांच से भर दिया। यहां सात वर्षीय बाघिन टी-111, जिसे 'शक्ति' के नाम से जाना जाता है, ने पानी के सबसे खतरनाक शिकारी माने जाने वाले मगरमच्छ को मौत के घाट उतार दिया। यह घटनाक्रम रणथंभौर के जोन नंबर 4 स्थित जामुन देह क्षेत्र में सुबह की सफारी के दौरान करीब 9 बजे घटित हुआ।
शिकार की तलाश में बाघिन शक्ति तालाब के किनारे बेहद चतुराई से घात लगाकर बैठी हुई थी। जैसे ही एक भारी-भरकम मगरमच्छ पानी से निकलकर किनारे पर आया, शक्ति बिजली की फुर्ती से उस पर टूट पड़ी और उसके गले को अपने शक्तिशाली जबड़ों में जकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले से मगरमच्छ को संभलने का तनिक भी अवसर नहीं मिला। बाघिन और मगरमच्छ के बीच करीब 10 मिनट तक भीषण संघर्ष चला, लेकिन अंततः शक्ति के पराक्रम के आगे मगरमच्छ ने दम तोड़ दिया। शिकार सुनिश्चित करने के बाद बाघिन उसे जबड़े में दबोचकर चट्टानों के रास्ते जंगल की ओर ले गई।
इस हैरतअंगेज दृश्य को वहां मौजूद पर्यटकों ने अपने कैमरों में कैद किया। आमतौर पर बाघ मगरमच्छ जैसे विशालकाय और कठिन शिकार से बचते हैं, इसलिए यह घटना अत्यंत दुर्लभ मानी जा रही है। शक्ति के इस शिकार ने उसकी नानी और रणथंभौर की महान बाघिन 'मछली' की यादें ताजा कर दी हैं। मछली भी अपने शावकों की रक्षा के लिए मगरमच्छों से भिड़ जाती थी और उन्हें मिनटों में मार गिराती थी। इसी अद्वितीय साहस के कारण मछली को 'लेडी ऑफ लेक' और 'क्रोकोडायल किलर' के नाम से ख्याति मिली थी और वह देश की पहली ऐसी बाघिन बनी जिसके सम्मान में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया था। वंशावली के अनुसार, मछली की बेटी कृष्णा है और कृष्णा की बेटी यह बाघिन शक्ति है, जिसने आज अपनी नानी की विरासत को जीवंत कर दिया।

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