रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित ESZ में अवैध रिसोर्ट निर्माण, नियमों की अनदेखी
RIICO की औद्योगिक भूमि पर बिना वन विभाग की NOC के बन रहे तीन मंजिला रिसोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और NTCA के नियमों के उल्लंघन का आरोप।

टाइगर बचाओ” के सरकारी नारों के बीच रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्रों में होटल माफिया का दुस्साहस चरम पर है। राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित RIICO औद्योगिक क्षेत्र की जमीनों पर नियम विरुद्ध तरीके से भू-उपयोग बदलकर आलीशान रिसोर्ट्स का निर्माण किया जा रहा है, जबकि कानूनन इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। विशेष रूप से औद्योगिक भूखंड संख्या F-1 पर प्रशासन की कथित निगरानी के बावजूद धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है, जो सीधे तौर पर वन्यजीव संरक्षण कानूनों को चुनौती दे रहा है।
रणथम्भौर का 1113 वर्ग किमी क्षेत्र क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के रूप में सुरक्षित है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण स्पष्ट रूप से वर्जित है। पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के 1 किमी के दायरे में नए व्यावसायिक निर्माण पर पूर्ण रोक है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी पूर्व में टाइगर कॉरिडोर में प्रस्तावित रिसोर्ट प्रोजेक्ट्स को खारिज कर वन्यजीवों के निर्बाध विचरण को प्राथमिकता दी है। इसके बावजूद, RIICO के बायलॉज का खुला उल्लंघन करते हुए खंडार रोड पर निर्धारित 15 मीटर की ऊंचाई सीमा को पार कर 18 मीटर ऊंचा तीन मंजिला रिसोर्ट खड़ा कर दिया गया है। हालांकि RIICO ने अक्टूबर 2025 में औद्योगिक से वाणिज्यिक रूपांतरण की अनुमति जारी की, किंतु इसके लिए अनिवार्य वन विभाग की एनओसी (NOC) प्राप्त नहीं की गई।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में विधायक किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में उन 19 होटलों की सूची प्रस्तुत की थी, जो रणथम्भौर और सरिस्का की वन भूमि पर अवैध रूप से संचालित हैं, जिनमें अमान-ए-खास, शेर बाग और ओबेरॉय जैसे प्रतिष्ठित नाम सम्मिलित हैं। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में बफर जोन के भीतर 400 से अधिक अवैध रिसोर्ट सक्रिय हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस स्थिति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रशासन और पुलिस के अपेक्षित सहयोग के अभाव में इन पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पा रही है। विडंबना यह है कि जहां नियम निर्माण पर रोक लगाते हैं, वहीं पर्यटन मंत्री पूर्व में 10 किमी के दायरे में होटल निर्माण की पैरवी कर चुके हैं। वर्तमान में कोर क्षेत्र, बफर जोन और ESZ के 1 किमी तक नया व्यावसायिक निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है, जबकि 1-10 किमी के दायरे में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की एनओसी और 15 मीटर की ऊंचाई की शर्त अनिवार्य है। इन कड़े प्रावधानों के बाद भी भू-माफियाओं की सक्रियता रणथम्भौर के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

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