विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व की सीमा से महज 1000 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में RIICO के औद्योगिक भूखंडों पर अवैध रूप से होटल, रिसोर्ट और टूरिज्म यूनिट बनाने का मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सवाई माधोपुर के कई औद्योगिक क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर कमर्शियल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट और MoEFCC के कड़े निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल 2023 के ऐतिहासिक फैसले में साफ कहा था कि "राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट की सीमा से 1 किलोमीटर के अंदर माइनिंग व किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य अनुमत नहीं होगा।" कोर्ट ने इसे न्यायालय की अवमानना माना है। इसके अलावा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की गाइडलाइन में भी स्पष्ट है कि "संरक्षित क्षेत्र या ईको-सेंसिटिव जोन की सीमा से 1 किमी के अंदर किसी भी प्रकार का नया कमर्शियल निर्माण अनुमत नहीं होगा।"

ESZ मॉनिटरिंग कमेटी की आपत्ति और खारिज प्रस्ताव

रणथंभौर ESZ मॉनिटरिंग कमेटी की पिछली बैठक में सामने आया कि टाइगर रिजर्व की सीमा से 500 से 900 मीटर की दूरी पर RIICO के औद्योगिक प्लॉटों पर होटल, रिसोर्ट, वेयरहाउस और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के 11 प्रस्ताव आए थे। कमेटी ने इन सभी प्रस्तावों को अवैध मानते हुए खारिज कर दिया है क्योंकि 1000 मीटर का ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ वन्यजीवों और पर्यटकों की जान के लिए महत्वपूर्ण है। वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि "1 किमी का दायरा ‘नो-गो जोन’ है। यहाँ टूरिज्म यूनिट बनाना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा उल्लंघन है। इससे टाइगर के मूवमेंट पर असर पड़ता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है।"

RIICO आवंटन शर्तों का खुला उल्लंघन

RIICO के नियमानुसार औद्योगिक प्लॉट केवल फैक्ट्री और वेयरहाउस जैसे औद्योगिक उपयोग के लिए हैं। इन पर होटल या रिसोर्ट बनाना मूल आवंटन शर्तों का उल्लंघन है। नियमानुसार कमर्शियल उपयोग के लिए लैंड यूज कन्वर्जन कराना और प्रचलित दर का 2 गुना शुल्क जमा करना अनिवार्य है, लेकिन ESZ के 1 किमी दायरे में तो कन्वर्जन भी अनुमत नहीं है। इस पारिस्थितिकी संकट पर वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राकेश शर्मा कहते हैं कि "रणथंभौर में पहले से ही टूरिस्ट दबाव बहुत ज्यादा है। 1 किमी बफर में होटल बनाने से टाइगर के प्राकृतिक गलियारे बंद हो जाएंगे। रात में DJ, लाइट और शोर से वन्यजीवों का व्यवहार बदलता है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है।"

प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य की मांग

जिला कलेक्टर कार्यालय के अनुसार मामला संज्ञान में है और सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि 1 किमी दायरे में कोई नया निर्माण न हो। पुराने अवैध निर्माण का सर्वे कराया जा रहा है। वहीं RIICO के यूनिट हेड ने कहा कि "बिना अनुमति के कमर्शियल उपयोग करने वालों के प्लॉट निरस्त किए जाएंगे।" जनहित में यह मांग उठाई गई है कि रणथंभौर से 1 किमी तक के क्षेत्र को “नो-कंस्ट्रक्शन जोन” घोषित कर बोर्ड लगाए जाएं, अवैध रूप से चल रहे सभी होटल-रिसोर्ट को तुरंत सीज किया जाए, दोषी अधिकारियों और भू-माफिया पर FIR दर्ज हो तथा सैटेलाइट इमेज से पूरे क्षेत्र की मैपिंग कर अवैध निर्माण चिन्हित किए जाएं।

कानून और दंड के प्रावधान

वर्तमान कानून के अनुसार 1 किमी के दायरे में नया होटल या रिसोर्ट बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस क्षेत्र में माइनिंग करना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है। साथ ही रात 10 से सुबह 6 तक DJ और लाउडस्पीकर पर पूर्ण बैन है। नियमों के उल्लंघन पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में 3 साल तक की जेल का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।

Pratahkal Bureau

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