सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथम्भौर बाघ परियोजना क्षेत्र में वर्षा ऋतु के दौरान मवेशी चराने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट काना राम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र में मवेशियों के प्रवेश और चराई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रशासनिक निर्णय क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्रीय उद्यान के अस्तित्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

प्रशासन के अनुसार, असामाजिक तत्वों और आसपास के गांवों के निवासियों द्वारा वर्षा ऋतु में मवेशियों को बाघ परियोजना क्षेत्र में ले जाने और अन्य लोगों को इसके लिए प्रेरित करने की गतिविधियों के कारण अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। इस तनावपूर्ण माहौल के चलते क्षेत्र में शांति भंग होने की प्रबल आशंका बनी हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा और बाघ संरक्षण पर भी खतरा मंडराने लगा था।

जारी आधिकारिक आदेश के तहत, सवाई माधोपुर जिले में अब कोई भी व्यक्ति, संगठन या दल प्रतिबंधित क्षेत्र में मवेशी चराने के लिए लोगों को प्रेरित करने हेतु सभा, धरना, प्रदर्शन या किसी भी अन्य कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर सकेगा। साथ ही, किसी भी व्यक्ति या समूह के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र में मवेशियों के साथ प्रवेश करना पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट का यह आदेश 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गया है, जो 31 अगस्त, 2026 की शाम 6 बजे तक लागू रहेगा। प्रशासन का यह कदम बाघ परियोजना की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में कानून व्यवस्था और वन्यजीव सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है।

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