रणथंभौर में ESZ नियमों के उल्लंघन का आरोप, 50 कमरों के होटल पर जांच की मांग
रणथंभौर टाइगर रिजर्व की सीमा के पास 50 कमरों के लग्जरी होटल और रूफटॉप कॉफी हाउस के निर्माण पर सवाल उठे हैं। ESZ नियमों के उल्लंघन, भूमि बिक्री और अधिकारियों की भूमिका की जांच के साथ अवैध निर्माण सीज करने की मांग की गई है।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व की सीमा से सटी भूमि पर कथित अवैध निर्माण, जमीन की बिक्री और पर्यावरण-संबंधी नियमों के उल्लंघन को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। 17 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर की भू-संपदा, चारागाह भूमि, तालाबों और आरक्षित वन क्षेत्रों की सीमा में हो रही गतिविधियों की जांच कराने तथा इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में बने सभी अवैध निर्माणों को सीज करने की मांग की गई है। इसमें जिला कलेक्टर, रणथंभौर के मुख्य वन संरक्षक (CCF), राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) और नगर विकास न्यास (UIT) के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी शामिल है।
प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व की भू-संपदा, चारागाह भूमि और पदम तालाब, राज बाग, मलिक तालाब तथा सुरवाल जैसे जल स्रोतों के आसपास की जमीन पर बिक्री, अतिक्रमण और व्यावसायिक निर्माण हो रहे हैं। आरक्षित वन क्षेत्रों की सीमा में भी ऐसी गतिविधियां होने का आरोप है। विज्ञप्ति के अनुसार, इन गतिविधियों से सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिला मुख्यालय पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने के बजाय अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं और बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के निर्माण तथा व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में एक समाचार पत्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि रणथंभौर की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में व्यावसायिक निर्माण नहीं हो सकता, इसके बावजूद स्वागत एंट्री गेट के पास फॉरेस्ट लैंड से सटी जगह पर 50 कमरों का लग्जरी होटल और रूफटॉप कॉफी हाउस बना दिया गया है। आरोप है कि वहां केवल बगीचा दिखाकर सीटेक्स सीमा में अवैध निर्माण किया जा रहा है। विज्ञप्ति में इस निर्माण को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की खुलेआम अवमानना बताते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के 3 जून 2022 के आदेश का उल्लेख किया गया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में न्यायालय ने देश के प्रत्येक राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर तक इको-सेंसिटिव जोन रखने का निर्देश दिया था। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित है।
इसके अलावा राजस्थान सरकार के 26 दिसंबर 2002 और 31 मार्च 2015 के आदेशों का हवाला दिया गया है। विज्ञप्ति के मुताबिक, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से 500 मीटर तक निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध है, जबकि एक किलोमीटर तक वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) अनिवार्य है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 29 और 35(6) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आरक्षित वन और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट में केंद्र सरकार की अनुमति के बिना गैर-वानिकी गतिविधियां अपराध हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में रणथंभौर से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2024 के विशिष्ट आदेश का भी जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, उलियाना गांव के पास कोर एरिया में 150 हेक्टेयर भूमि पर हो रहे अवैध खनन पर न्यायालय ने तत्काल रोक लगाई थी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि न्यायालय ने मंदिर, होटल या किसी भी प्रकार के अनधिकृत विस्तार को बर्दाश्त नहीं करने की बात कही थी।
रणथंभौर में निर्माण और भूमि संबंधी अनियमितताओं के संदर्भ में वर्ष 2015 के राजस्थान लोकायुक्त के मामले का भी उल्लेख किया गया है। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उस समय जिला कलेक्टर द्वारा वन विभाग की कथित गलत रिपोर्ट के आधार पर एक होटल व्यवसायी को भूमि रूपांतरण की अनुमति दी गई थी। आरोप था कि 800 मीटर की दूरी पर स्थित जमीन को रिपोर्ट में 1100 मीटर बताया गया था। इस मामले में राजस्थान लोकायुक्त ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन माना था और जिला कलेक्टर तथा उप वन संरक्षक (DCF) से मूल NOC तलब की थी।
वर्तमान स्थिति के बारे में प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि फॉरेस्ट रोड और रणथंभौर रोड पर ESZ के भीतर बिना NOC के आलीशान होटल, बंगले और गेस्ट हाउस बनाए जा रहे हैं। चारागाह और तालाबों की गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर बेचने के आरोप भी लगाए गए हैं। विज्ञप्ति में RIICO, नगर विकास न्यास और राजस्व विभाग पर पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना पट्टे जारी करने तथा नक्शे पास करने का आरोप लगाया गया है।
वन विभाग के DFO कार्यालय के कथित बयान, “जहां निर्माण हो रहा है, वह फॉरेस्ट की भूमि नहीं”, पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि सैटेलाइट मैप और एक किलोमीटर की सीमा से संबंधित नियम इस बयान के विपरीत हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि यदि 500 मीटर वाला नियम लागू माना जाए, तब भी संबंधित निर्माण अवैध होने का आरोप है।
प्रेस विज्ञप्ति में मांग की गई है कि जिला कलेक्टर, रणथंभौर के CCF, RIICO और UIT के अधिकारियों की भूमिका की जांच कर ESZ में बने सभी कथित अवैध निर्माणों को सीज किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना के आरोप में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही रणथंभौर के ESZ का अंतिम अधिसूचना दस्तावेज सार्वजनिक करने और एक किलोमीटर की सीमा का सीमांकन कराने की मांग उठाई गई है। अब इन आरोपों और मांगों के संदर्भ में भूमि की स्थिति, निर्माण की वैधता, संबंधित स्वीकृतियों तथा अधिकारियों की भूमिका की जांच इस मामले का प्रमुख विषय है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
