रणथंभौर रोड फार्म हाउस योजना पर हाईकोर्ट की रोक, यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
सवाई माधोपुर के खिलचीपुर में चारागाह भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार और यूआईटी को नोटिस जारी किया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने सवाई माधोपुर के ग्राम खिलचीपुर में प्रस्तावित फार्म हाउस योजना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जयपुर में 28 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि विवादित चारागाह भूमि पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाए और किसी भी प्रकार के तीसरे पक्ष के अधिकार नहीं बनाए जाएं।
हाई कोर्ट की खंडपीठ का अहम आदेश और जनहित याचिका
यह अहम आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति शुभा मेहता की खंडपीठ ने जनहित याचिका (PIL) संख्या 3734/2026 की सुनवाई के दौरान दिया। मामला रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आसपास की संवेदनशील भूमि से जुड़ा होने के कारण कोर्ट ने इसे गंभीर माना है। ग्राम खिलचीपुर के ग्रामीणों की ओर से उनके अधिकृत प्रतिनिधि महेश कुमार जैन द्वारा यह याचिका दायर की गई है।
चारागाह और गैर मुमकिन रास्ता भूमि के व्यावसायिक उपयोग का आरोप
याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया है कि "चारागाह और गैर मुमकिन रास्ता श्रेणी की जमीन को शहरी सुधार न्यास (UIT) के अधीन मानते हुए वहां फार्म हाउस, होटल और रिसॉर्ट जैसी व्यावसायिक गतिविधियों की तैयारी की जा रही है।" याचिकाकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि "यह भूमि पारंपरिक रूप से ग्रामीणों और पशुओं के उपयोग के लिए रही है और इसका व्यावसायिक उपयोग कानून के खिलाफ है।"
संबंधित विभागों को नोटिस और चार सप्ताह में जवाब तलब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार सहित सभी संबंधित विभागों- शहरी विकास विभाग, स्थानीय स्वशासन विभाग, जिला कलेक्टर, UIT, नगर परिषद और तहसीलदार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में UIT सवाई माधोपुर को निर्देश दिया है कि वह रणथंभौर रोड स्थित फार्म हाउस योजना पर फिलहाल कोई भी आगे की कार्रवाई न करे और जमीन की मौजूदा स्थिति को जस का तस बनाए रखे।
तीसरे पक्ष के अधिकार सृजित करने पर पूर्ण पाबंदी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस अवधि में किसी भी प्रकार के तीसरे पक्ष के अधिकार सृजित नहीं किए जाएंगे। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब रणथंभौर क्षेत्र के आसपास भूमि उपयोग को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रामीण सार्वजनिक संसाधनों और पारंपरिक भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए भी एक अहम कदम साबित हो सकता है।

Pratahkal Bureau
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