रणथम्भौर में युवाओं ने सीखा संरक्षण का पाठ: 'माय भारत' लर्निंग प्रोग्राम का सफल समापन
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में युवाओं के लिए आयोजित चार दिवसीय 'माय भारत' एक्सपीरियंशियल लर्निंग प्रोग्राम का समापन हुआ। वन्यजीव संरक्षण से लेकर आधुनिक तकनीक तक, युवाओं ने सीखा प्रकृति को बचाने का भविष्योन्मुखी पाठ। क्या यह पहल भारत के संरक्षण भविष्य की नई तस्वीर है?

सवाई माधोपुर में वन विभाग के कार्यालय के बाहर 'माय भारत' कार्यक्रम के प्रतिभागी और अधिकारी, जिन्होंने चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन प्रबंधन का अनुभव प्राप्त किया।
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की जीवंत विरासत और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में युवाओं की भागीदारी को नई ऊर्जा देते हुए, चार दिवसीय 'माय भारत एक्सपीरियंशियल लर्निंग प्रोग्राम' का सफल समापन हुआ। जिला कलक्टर काना राम के मार्गदर्शन और उपवन संरक्षक मानस सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और सतत पर्यटन के प्रति न केवल जागरूक करना, बल्कि उन्हें व्यावहारिक धरातल पर प्रकृति से जोड़ना था।
कार्यक्रम के दौरान रणथम्भौर के वन प्रबंधन, बाघों के सुरक्षित आवास और पर्यटन संचालन के विभिन्न आयामों को करीब से समझने का अवसर युवाओं को मिला। नोडल अधिकारी एवं सहायक वन संरक्षक महेश कुमार शर्मा तथा सोशियोलॉजिस्ट ममता साहू के निर्देशन में प्रतिभागियों ने सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ क्षेत्र भ्रमण और संवाद सत्रों के माध्यम से संरक्षण की चुनौतियों और समाधानों को आत्मसात किया। प्रथम दिवस के उन्मुखीकरण सत्र में मानस सिंह ने रणथम्भौर की गौरवशाली संरक्षण यात्रा और बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ युवाओं के कंधों पर आने वाली जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अत्याधुनिक संरक्षण तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। क्षेत्रीय वन अधिकारी अश्विनी प्रताप सिंह ने युवाओं को कैमरा ट्रैप तकनीक, वन्यजीव मॉनिटरिंग प्रणाली, जल स्रोत प्रबंधन और गश्ती व्यवस्थाओं का बारीकी से प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंतर्गत अमरेश्वर महादेव क्षेत्र में स्वच्छता और श्रमदान का विशेष आयोजन किया गया, जहाँ रूप सिंह मीणा और गोवर्धन मीणा के मार्गदर्शन में युवाओं ने प्लास्टिक मुक्त और हरित रणथम्भौर का संदेश देते हुए पर्यटकों और श्रद्धालुओं को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया।
अंतिम चरण में उप वन संरक्षक (पर्यटन) संजीव शर्मा ने युवाओं को रणथम्भौर की सफारी प्रणाली, ऑनलाइन बुकिंग और गाइड प्रबंधन के साथ-साथ सतत पर्यटन की बारीकियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में शामिल 23 युवा स्वयंसेवकों ने इस चार दिवसीय अनुभव को प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता विकसित करने का एक अनूठा अवसर बताया। समापन समारोह में युवाओं ने वन्यजीवों, जल और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लिया। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सफल रही, बल्कि रणथम्भौर जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए एक नई और जागरूक पीढ़ी तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है।

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