सवाई माधोपुर में रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के अंतर्गत चलाए जा रहे “रणथम्भौर बाघ रक्षक कार्यक्रम” के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति निरंतर जागरूक किया जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र निदेशक शारदा प्रताप सिंह तथा उप वन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक (प्रथम) मानस सिंह के दिशा-निर्देशानुसार सोशियोलोजिस्ट ममता साहू द्वारा इस कार्यक्रम का सतत आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा जा चुका है।

इसी क्रम में जीनापुर गांव के ग्रामीणों के लिए वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि वन केवल वन्यजीवों का आवास नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए स्वच्छ वायु, वर्षा चक्र और पर्यावरणीय संतुलन का प्रमुख आधार भी हैं।

कार्यक्रम के दौरान सिंगल-यूज प्लास्टिक से पर्यावरण और वन्यजीवों को होने वाले गंभीर नुकसान के प्रति भी ग्रामीणों को सचेत किया गया। साथ ही उन्हें अपने गांव एवं आसपास के वन क्षेत्रों को प्लास्टिक-मुक्त और स्वच्छ रखने का संदेश दिया गया। जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वन एवं वन्यजीव सुरक्षा संबंधी जानकारी वाली बुकलेट और स्टिकर्स वितरित किए गए तथा प्लास्टिक उपयोग पूरी तरह बंद करने के आह्वान के साथ सभी ग्रामीणों को जूट के कैरी बैग भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीणों को रणथम्भौर नेशनल पार्क का भ्रमण भी कराया गया, ताकि वे प्रकृति और वन्यजीवों को निकट से समझ सकें। भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने पार्क की प्राकृतिक संपदा, विभिन्न वन्यजीवों, स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों तथा बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा। वन विभाग के प्रतिनिधियों ने मौके पर ही ग्रामीणों को जंगल के पर्यावरणीय महत्व, वन्यजीवों के व्यवहार और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

जून माह में बाघ रक्षक कार्यक्रम अभियान के तहत जमुलखेडा, जनकपुर की ढाणी, खवां, खांडोज, रावंल, पाडली, भदलाव, कुण्डेरा, श्यामपुरा, खेरदा, कुतलपुरा मालियान, नीमली खुर्द सहित अनेक गांवों में ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व तथा संरक्षण गतिविधियों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।

उप वन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि रणथम्भौर टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा संचालित इस “बाघ रक्षक कार्यक्रम” का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को सीधे वन्यजीव संरक्षण अभियानों से जोड़ना है, ताकि स्थानीय भागीदारी के माध्यम से वन एवं बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

फोटो कैप्शन में उल्लेखित किया गया कि वन विभाग के प्रतिनिधि ग्रामीणों को जंगल के पर्यावरणीय महत्व, वन्यजीवों के व्यवहार और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जबकि अन्य तस्वीरों में वन्यजीव सुरक्षा संबंधी बुकलेट और स्टिकर्स का वितरण दर्शाया गया है।

Pratahkal Bureau

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