सवाई माधोपुर, 20 अगस्त। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की 83वीं जयंती के अवसर पर राजीव गांधी अध्ययन मंडल, सवाई माधोपुर द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय वेबिनार में राजीव गांधी के विचारों और नीतियों का वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक एवं तकनीकी परिस्थितियों के संदर्भ में आलोचनात्मक पुनर्मूल्यांकन किया गया। वेबिनार का विषय “राजीव गांधी ने जिस भारत का सपना देखा और जिस भारत में हम आज जी रहे हैं : एक आलोचनात्मक पुनर्मूल्यांकन” रहा।

वेबिनार के मुख्य वक्ता प्रो. बी. के. शर्मा ने कहा, “ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती—वह सदैव सार्वभौमिक और उदार होता है।” उन्होंने कहा कि आज जब विश्व को एक सार्वभौमिक ज्ञान व्यवस्था (Universal Knowledge System) की आवश्यकता है, ऐसे समय में वर्तमान सत्ता व्यवस्था इंडियन नॉलेज सिस्टम के नाम पर प्रतिगामी, अतीतगामी और अवैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ावा दे रही है। उनके अनुसार ज्ञान की प्रकृति सदैव सार्वभौमिक और उदार होती है तथा उसे किसी संकीर्ण भौगोलिक अथवा सांस्कृतिक सीमा में बांधा नहीं जा सकता।

प्रो. शर्मा ने कहा कि 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपने समय में कहीं अधिक प्रगतिशील और भविष्यदर्शी थी, जबकि NEP 2020 को लागू हुए छह वर्ष बीत जाने के बावजूद वह अपने वास्तविक स्वरूप में जमीन पर नहीं उतर पाई है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में अनेक ऐसे विचार हैं, जिन्हें व्यावहारिक धरातल पर लागू करना कठिन है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की सोच आधुनिक, वैज्ञानिक और भविष्य को ध्यान में रखकर शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की थी।

डॉ. भारत मीणा ने जवाहर नवोदय विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजीव गांधी की इस पहल ने ग्रामीण प्रतिभाओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने का सुनहरा अवसर प्रदान किया। इन विद्यालयों ने ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वक्ताओं ने कहा कि राजीव गांधी की विशेषता यह थी कि उन्होंने अतीत की गलतियों से सीख ली, वर्तमान को तार्किक दृष्टि से समझा और भविष्य का सपना वैज्ञानिक सोच के साथ देखा। उन्होंने देश को आधुनिक तकनीक, सूचना क्रांति और युवा शक्ति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।

झालावाड़ के डॉ. फूल सिंह, सवाई माधोपुर के डॉ. धर्मेंद्र कुमार, करौली के डॉ. नाथू सिंह तथा अजमेर के डॉ. कैलाश सिलोलीया ने राजीव गांधी द्वारा किए गए प्रगतिशील कार्यों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने विशेष रूप से युवा सशक्तीकरण, पंचायती राज और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी द्वारा अपने समय में लिए गए अनेक निर्णयों का प्रभाव आज के भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

वेबिनार के समापन पर समन्वयक डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि आज की ज़ेन ज़ी जिस तरह सोशल मीडिया का उपयोग संवाद, विचार अभिव्यक्ति और सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता के लिए कर रही है, उसमें राजीव गांधी की उस भविष्यदर्शी सोच की झलक दिखाई देती है, जिसमें उन्होंने सूचना और संचार तकनीक को आने वाले भारत की शक्ति के रूप में देखा था।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय चावला ने किया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजीव गांधी की विरासत का मूल्यांकन केवल स्मरण तक सीमित न रहकर वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों के संदर्भ में किया जाना चाहिए।

वेबिनार में विभिन्न जिलों से शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं युवाओं ने ऑनलाइन सहभागिता की। इस तरह राज्यस्तरीय वेबिनार में राजीव गांधी के विचारों, नीतियों और उनके दूरगामी प्रभावों को वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक एवं तकनीकी परिस्थितियों के संदर्भ में विचार-विमर्श के केंद्र में रखा गया।

Pratahkal Newsroom

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