राजस्थान शिक्षक संघ का अवकाश कटौती के खिलाफ सद्बुद्धि यज्ञ
शिक्षकों ने ग्रीष्मावकाश में कटौती और लंबित पदोन्नति के विरोध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर हनुमान चालीसा पाठ और यज्ञ कर विरोध जताया।

राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीना के नेतृत्व में शिक्षक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर सरकार के खिलाफ सद्बुद्धि यज्ञ करते हुए।
ग्रीष्मावकाश सहित अन्य अवकाशों में मनमानी कटौती के विरोध में राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) का प्रांतव्यापी आंदोलन तेज हो गया है। इसी क्रम में जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) कार्यालय के बाहर संगठन के प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीना के नेतृत्व में शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सद्बुद्धि प्रदान करने की कामना के साथ सद्बुद्धि यज्ञ आयोजित किया। आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अवकाश कटौती के निर्णय को अव्यावहारिक बताया।
जिला अध्यक्ष अमर सिंह मीना ने बताया कि सद्बुद्धि यज्ञ से पूर्व संगठन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने सामूहिक रूप से श्री हनुमान चालीसा के 21 पाठ किए और सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच शिक्षकों और विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
जिला मंत्री सुनील गोयल ने कहा कि कॉलेज शिक्षा में 60 दिन का ग्रीष्मावकाश निर्धारित किया गया है, जबकि स्कूली शिक्षा में केवल 35 दिन का अवकाश रखा गया है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था में असमानता बताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में बच्चों को स्कूल बुलाना पूर्ण रूप से अव्यावहारिक और स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है।
संगठन के प्रदेश कार्यालय मंत्री विजेन्द्र सिंह खटाना ने कहा कि तृतीय वेतन श्रृंखला अध्यापकों की पदोन्नति एवं स्थानांतरण का कार्य पिछले 5 से 6 वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है, जिससे शिक्षकों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सद्बुद्धि यज्ञ में तेजराम बालोती, देवेन्द्र चौधरी, मनीष शर्मा, रमेश डूडीपुरा, पीयूष गोयल, अनिल वैष्णव, राजकुमार गर्ग, सौरभ जैन, चंद्रभान सिंह, नरसी लाल मीना, रविन्द्र गुर्जर, सतनारायण सैन, प्रहलाद मीना, प्रकाश चंद मीना, नमोनारायण मीना, विश्राम मीना, सागर सिंह और लेखराम मीना सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं पदाधिकारियों ने आहुतियां दीं। आंदोलन के माध्यम से शिक्षकों ने स्पष्ट संकेत दिया कि अवकाश कटौती, पदोन्नति और स्थानांतरण जैसे लंबित मुद्दों को लेकर अब संघर्ष और तेज किया जाएगा।

Pratahkal Bureau
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