राजस्थान में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कथित नकारात्मक, तानाशाहीपूर्ण और पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। जयपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के पदाधिकारियों और कर्मचारी महासंघ के प्रमुखों ने साफ कर दिया है कि यदि शिक्षकों की न्यायसंगत मांगें नहीं मानी गईं और दमनकारी नीतियां बंद नहीं हुईं, तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन का आगाज किया जाएगा। इस दौरान शिक्षक संघ की स्थायी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से शिक्षा मंत्री के खिलाफ एक कड़ा निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसने इस टकराव को और ज्यादा गहरा दिया है।

इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ शिविरा पंचांग 2026-27 में ग्रीष्मावकाश में 10 दिन और संस्थाप्रधान के अधिकृत अवकाश में 1 दिन की कटौती का लिया गया मनमाना निर्णय है। संगठन इस कटौती के विरोध में लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलनरत था। जब शिक्षा मंत्री के स्तर पर इस विषय में घोर उदासीनता दिखाई गई, तो विवश होकर गत 18 मई 2026 को रामगंजमंडी, कोटा में 3000 से अधिक शिक्षकों ने एकजुट होकर एक ऐतिहासिक और पूरी तरह से शांतिपूर्ण रैली निकाली थी। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि इस विशाल रैली की सफलता से पूरी तरह बौखलाकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पुलिस-प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाया। इसी राजनीतिक दबाव के चलते 22 मई 2026 की रात्रि ठीक 11:30 बजे भाजपा पदाधिकारी श्रीमती नारंगी मीना के मार्फत शिक्षकों पर एक पूरी तरह से झूठी और निराधार FIR दर्ज करवा दी गई। यह बात भी विशेष रूप से रेखांकित की गई है कि शिकायतकर्ता महिला न तो शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र से संबंध रखती हैं और न ही वह कोटा जिले की निवासी हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे साक्ष्यों से यह भी पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि इस मनगढ़ंत FIR के दर्ज होने के तुरंत बाद स्वयं शिक्षा मंत्री उस महिला पदाधिकारी को शॉल और दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित कर रहे थे, जो इस पूरी साजिश को उजागर करता है।

संवाददाता सम्मेलन में संगठन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा ने विधिक और प्रशासनिक पहलुओं को सामने रखते हुए स्पष्ट किया कि रामगंजमंडी में आयोजित रैली से पूर्व स्थानीय पुलिस और प्रशासन को नियमानुसार विधिवत सूचना दी गई थी। पूरी रैली पुलिस की सीधी देखरेख में अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी, इसलिए FIR में लगाए गए सभी आरोप और उल्लिखित तथ्य पूर्णतः मनगढ़ंत हैं। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री पर संवैधानिक गरिमा के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि पद की शपथ लेने के बाद से ही वह केवल एक विशेष शिक्षक संगठन को ही अनुचित सहयोग और संरक्षण दे रहे हैं, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है। यहाँ तक कि ग्रीष्मावकाश की कटौती को आंशिक रूप से वापस लेने का निर्णय भी आंदोलनकारी मूल संगठन से वार्ता करने के बजाय एक 'तथाकथित संगठन' को बुलाकर और सिर्फ फोटोशूट करवाकर किया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला उपहास है।

आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक एवं मुख्य महामंत्री उम्मेद सिंह डूडी ने कहा कि शिक्षा मंत्री की इस अलोकतांत्रिक कार्यशैली और विभाग में व्याप्त तमाम प्रशासनिक अनियमितताओं की विस्तृत जानकारी महामहिम राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, माननीय मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को लिखित रूप में सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। यदि अगले 15 दिनों के भीतर शासन-प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जुलाई 2026 से राजस्थान में शिक्षा मंत्री का जहाँ भी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम होगा, वहाँ हजारों शिक्षकों द्वारा उनका उग्र घेराव किया जाएगा और उन्हें काले झंडे दिखाए जाएंगे। इस देशव्यापी आंदोलन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष संघर्ष टीम की घोषणा 25 जून 2026 को की जाएगी। यदि इसके बाद भी दमनकारी रुख नहीं बदला, तो सैंकड़ों की संख्या में शिक्षक दिल्ली कूच करने के लिए विवश होंगे। शिक्षकों के इस संघर्ष को अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने भी अपना पूर्ण समर्थन दे दिया है। महासंघ के प्रमुख महेंद्र सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राणा ने दोटूक शब्दों में संवाददाताओं को चेतावनी दी कि यदि आगामी 15 जून 2026 तक शिक्षकों पर दर्ज की गई झूठी FIR को बिना शर्त वापस नहीं लिया गया, तो जयपुर, कोटा या रामगंजमंडी में से किसी भी एक रणनीतिक केंद्र पर हजारों कर्मचारियों और शिक्षकों का एक ऐतिहासिक महापड़ाव डाल दिया जाएगा।

प्रेस वार्ता में शिक्षकों की अन्य सुलगती हुई समस्याओं को उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि अध्यापक लेवल-1 और लेवल-2 के शिक्षकों के साथ लंबे समय से घोर अन्याय किया जा रहा है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर पूरी तरह से रोक लगी होने के कारण हजारों शिक्षक वर्षों से अपने गृह जिलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर पड़े हैं, विशेषकर डार्क जोन में फंसे इन शिक्षकों को राहत देने के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं है। इसके अलावा अध्यापक लेवल-1 व 2 की वर्षों से लंबित पड़ी DPC की प्रक्रिया को बिना किसी विलंभ के तुरंत पूरा किया जाना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा विभाग की विसंगतियों का आलम यह है कि राज्य के कई विद्यालयों में नामांकन बेहद कम होने के बावजूद भी वहाँ जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात हैं, जबकि इसके विपरीत अत्यधिक नामांकन वाले ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। संगठन ने मांग की है कि सरकार तुरंत व्यावहारिक स्टाफिंग पैटर्न और शिक्षकों का युक्तिकरण यानी समानीकरण लागू करे।

नेताओं ने विभाग में व्याप्त भय के माहौल की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गैर-शैक्षणिक कार्यों की बहुलता, लगातार ऑनलाइन डाटा फीडिंग का मानसिक दबाव और बात-बात पर निलंबन व चार्जशीट देने की धमकियों के कारण आज राजस्थान का शिक्षक अत्यंत भय और गहरे मानसिक उत्पीड़न के साए में काम करने को मजबूर है। वहीं दूसरी ओर, तबादलों में स्थापित नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर केवल राजनेताओं के चहेतों को उपकृत किया जा रहा है। शिक्षक संघ (सियाराम) ने सरकार के समक्ष अपनी चार मुख्य मांगें प्रमुखता से रखी हैं, जिनमें शिक्षकों पर दर्ज की गई झूठी FIR को अविलंब वापस लेना, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों से तुरंत प्रतिबंध हटाकर डार्क जोन के कर्मियों को राहत देना तथा पदोन्नति प्रक्रिया के अवरोध दूर करना, पूरे राज्य में व्यावहारिक स्टाफिंग पैटर्न व समानीकरण तुरंत लागू करना और शिक्षकों की समस्त लंबित मांगों पर तत्काल प्रभाव से वार्ता शुरू करना शामिल है। संगठन ने अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक राज्य की पूरी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था की रीढ़ हैं, वे इस प्रकार की तानाशाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि समय रहते शिक्षा मंत्री ने अपना दमनकारी रवैया नहीं बदला, तो पूरे राजस्थान में एक अत्यंत उग्र और प्रांतव्यापी आंदोलन खड़ा होगा, जिससे उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को महासंघ प्रमुख महेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राणा, संयुक्त महामंत्री कैलाश चन्द शर्मा, मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष नवीन कुमार शर्मा, संघर्ष समिति संयोजक उम्मेद सिंह डूडी एवं संयुक्त महामंत्री राजेन्द्र पारीक ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।

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