प्रदेश में आमजन की मूलभूत समस्याओं के निचले स्तर पर समाधान नहीं हो पाने की स्थिति में राजधानी में स्थापित राजस्थान संपर्क पोर्टल, जिसका 181 नंबर दिया गया है, अब अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। सरकार के अनुसार कोई भी आमजन बिजली, पानी, सीवरेज सहित अन्य समस्याओं को लेकर 181 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करा सकता है। इस पोर्टल की खास बात यह बताई जाती है कि इसे स्वयं मुख्यमंत्री मॉनिटर करते हैं और कई आईएएस व आरएएस अधिकारी इसकी निगरानी के लिए तैनात हैं।

इसके बावजूद पोर्टल पर दर्ज परिवादों के निस्तारण को लेकर गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। आरोप है कि शिकायतों का समाधान होने से पहले ही परिवादी को संदेश भेजकर यह सूचित कर दिया जाता है कि समस्या का समाधान कर दिया गया है और परिवाद बंद किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में समस्या जस की तस बनी रहती है।

इस कार्यप्रणाली का ताजा उदाहरण 25 अप्रैल की सुबह सामने आया, जब हाउसिंग बोर्ड सेक्टर एक, शीतला मंदिर क्षेत्र में पिछले 10 दिनों से नलों में केवल 20 से 25 मिनट तक बहुत कम प्रेशर से पानी आने की शिकायत 181 पर दर्ज कराई गई। शिकायत दर्ज होने के बाद 26 अप्रैल को स्थिति और बिगड़ गई और पूरे सेक्टर में एक बूंद पानी नहीं आया। क्षेत्रवासी पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकते रहे।

वहीं दूसरी ओर राजस्थान संपर्क पोर्टल की ओर से शिकायतकर्ता को संदेश भेजकर सूचित किया गया कि उसकी समस्या का समाधान कर दिया गया है और परिवाद निस्तारित किया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने पोर्टल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटना से स्पष्ट संकेत मिलता है कि राजस्थान संपर्क पोर्टल आमजन की समस्याओं के समाधान में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पा रहा है और इसकी वास्तविक उपयोगिता पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

Pratahkal Bureau

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