राजस्थान में मदिरा व्यापार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल के तहत आबकारी आयुक्त नमित मेहता के कड़े निर्देशों पर प्रदेश के शेष रहे 30 कलस्टरों की ई-नीलामी प्रक्रिया का आधिकारिक बिगुल फूंक दिया गया है। आबकारी एवं मद्य संयम नीति वर्ष 2025-29 के संशोधित प्रावधानों के अनुसरण में वर्ष 2026-27 के लिए नवीनीकरण से शेष रही 'पड़त' मदिरा दुकानों के बंदोबस्त हेतु यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विभागीय पोर्टल पर शुक्रवार, 15 मई 2026 को प्रातः 11 बजे से सायं 4 बजे तक ई-बोली आमंत्रित की गई है, जिसके माध्यम से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थित 30 कलस्टरों की कुल 62 दुकानों का भविष्य तय होगा।

इस जटिल प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ संपन्न करने के लिए इच्छुक बोलीदाताओं को सर्वप्रथम राजस्थान सरकार के आधिकारिक पोर्टल https//sso.rajasthan.gov.in पर सिटीजन श्रेणी के अंतर्गत अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) सृजित करनी होगी। इसके पश्चात विभागीय वेबसाइट https//iems.rajasthan.gov.in पर इसी आईडी के माध्यम से लॉगिन कर ई-ऑक्शन पोर्टल पर निर्धारित एक बारीय पंजीकरण पूर्ण करना अनिवार्य है। नीलामी की समयसीमा न्यूनतम 5 घंटे निर्धारित है, किंतु प्रतिस्पर्धा की स्थिति में इसे 10 मिनट के अनंत विस्तार तक तब तक जारी रखा जाएगा जब तक बोलियां आती रहेंगी। बोली लगाने के नियमों को सख्त रखते हुए स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक बोली न्यूनतम 10 हजार रुपये या उसके गुणांक में ही बढ़ाई जा सकेगी, जबकि अधिकतम सीमा के रूप में कोई भी बोलीदाता एक बार में रिजर्व प्राइस या पिछली बोली से 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर पाएगा।

वित्तीय अनुपालन के अंतर्गत कलस्टरों का जिलेवार विवरण, आवेदन शुल्क, संशोधित न्यूनतम रिजर्व प्राइस और अमानत राशि का संपूर्ण डेटा विभागीय वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया गया है। तकनीकी बाधाओं से बचने हेतु आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन शुल्क एवं न्यूनतम रिजर्व प्राइस की 2 प्रतिशत अमानत राशि का ऑनलाइन भुगतान नीलामी की तिथि से एक दिन पूर्व रात्रि 11:59 बजे तक सुनिश्चित कर लें। नियमानुसार बिड राशि के आधार पर अतिरिक्त अमानत राशि अथवा 'डायनेमिक अर्नेस्ट मनी' जमा कराना भी अनिवार्य होगा। डिजिटल सुरक्षा और समयबद्धता पर जोर देते हुए विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भुगतान में विफलता या तकनीकी कारणों से नीलामी में भाग न ले पाने की स्थिति में आवेदक स्वयं उत्तरदायी होंगे। आबकारी आयुक्त द्वारा निर्देशित यह विस्तृत बंदोबस्त राज्य के राजस्व संकलन और मदिरा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। (विनोद मोलपरिया/आकाश)

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