गंगापुर सिटी। न्यायिक पारदर्शिता और मानवीय अधिकारों की कसौटी पर कारागृह व्यवस्थाओं को परखने के उद्देश्य से बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने उप कारागृह गंगापुर सिटी का त्रैमासिक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन संख्या 1404/2023 सुकन्या सांथा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में दिए गए दिशा-निर्देशों की पालना में किया गया।

निरीक्षण की अध्यक्षता अखिलेश कल्याण, अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति गंगापुर सिटी एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने की। 16 दिसंबर को किए गए इस निरीक्षण के दौरान उप कारागृह में कुल 62 बंदी उपस्थित पाए गए। बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी स्थिति, सुविधाओं और अधिकारों के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।

निरीक्षण के दौरान बंदियों से विशेष रूप से इस बात की जानकारी ली गई कि क्या रसोईघर अथवा भोजन पकाने की व्यवस्था में जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव किया जा रहा है, क्या किसी वर्ग विशेष को अलग या विशेष व्यवहार दिया जा रहा है, तथा क्या बंदियों के वर्गीकरण या रजिस्टर में जाति से संबंधित कोई आपत्तिजनक प्रविष्टि की जा रही है। इसके अतिरिक्त जाति, लिंग या दिव्यांगता के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की स्थिति को भी परखा गया। संवाद और जांच के उपरांत यह तथ्य सामने आया कि उप कारागृह गंगापुर सिटी में बंदियों के साथ जाति या धार्मिक आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने प्रिजन लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता, जेल विजिटिंग लॉयर एवं जेल विजिटिंग अधिकार मित्र द्वारा की गई कार्यवाहियों की भी समीक्षा की। साथ ही बंदियों को प्रदान की जा रही भोजन, पेयजल और चिकित्सकीय सुविधाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान उप कारागृह के जेलर सुखबीर सिंह को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के समय उप जिला कलेक्टर बृजेंद्र मीणा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी बदन सिंह गुर्जर, बीसीएमओ गंगापुर सिटी बत्ती लाल मीणा, एडिशनल सीबीईओ हनुमान मुक्त, उप निदेशक कृषि गोपाल लाल शर्मा, पैनल अधिवक्ता मोहम्मद सैफ कलाम, अधिकार मित्र विकास सैनी सहित उप कारागृह का स्टाफ उपस्थित रहा। साथ ही प्रिजन लीगल एड क्लीनिक का भी निरीक्षण किया गया।

यह त्रैमासिक निरीक्षण न केवल कारागृह प्रशासन की जवाबदेही को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि बंदियों के संवैधानिक और मानवीय अधिकारों की रक्षा प्रभावी ढंग से हो, जिससे न्याय व्यवस्था पर समाज का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।

Pratahkal Bureau

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