प्रोफेसर मधु मुकुल चतुर्वेदी को राजा राम मोहन रॉय स्मृति सम्मान
हिंदी साहित्य, कला-संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय, आगरा ने प्रोफेसर मधु मुकुल चतुर्वेदी को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा।

ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय, आगरा द्वारा आयोजित समारोह में प्रोफेसर मधु मुकुल चतुर्वेदी को राजा राम मोहन रॉय स्मृति सम्मान प्रदान करते संस्था के पदाधिकारी।
हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार, सृजन, कला-संस्कृति एवं शैक्षणिक सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रोफेसर डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी को राष्ट्रीय स्तर पर ‘राजा राम मोहन रॉय स्मृति सम्मान’ से अलंकृत किया गया है। महान समाज सुधारक राजा राम मोहन रॉय की जयंती के पावन अवसर पर आगरा स्थित ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय द्वारा आयोजित एक गरिमामयी समारोह में यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार वर्मा, सचिव तिरवर नाथ, विधिक सलाहकार डॉ. नरेश कुमार सिहाग और कोषाध्यक्ष श्रीमती रीना देवी ने संयुक्त रूप से प्रोफेसर चतुर्वेदी को सम्मानित कर उनके साहित्यिक और अकादमिक कृतित्व को नमन किया।
प्रोफेसर चतुर्वेदी की साहित्यिक यात्रा अत्यंत समृद्ध रही है, जिसके अंतर्गत अब तक उनकी 15 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। एक प्रखर शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने अनेक शोधार्थियों का कुशल निर्देशन किया है, जबकि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 150 संगोष्ठियों में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्होंने शोध पत्रों का वाचन किया है। वे न केवल अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं के कुशल संपादक रहे हैं, बल्कि उनकी 150 से अधिक कहानियां और विविध विषयों पर आधारित आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उन्हें अन्य साहित्यकारों से विशिष्ट बनाती है। उनके इन अतुलनीय योगदानों को रेखांकित करते हुए भारत के विभिन्न प्रांतों द्वारा अब तक उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर 125 बार सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान न केवल प्रोफेसर चतुर्वेदी की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के उन्नयन के प्रति उनके आजीवन समर्पण की एक गौरवशाली स्वीकृति है।

