पांचना जल विवाद: किसान प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक का रास्ता साफ, 18 जून को भरतपुर में होगा अहम मंथन
पांचना बांध जल विवाद के समाधान को लेकर 18 जून को भरतपुर में अहम संयुक्त बैठक होगी। किसानों और प्रशासन के बीच होने वाली इस उच्च स्तरीय चर्चा पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं, जिससे बड़ा निर्णय संभव है।

भरतपुर संभागीय आयुक्त कार्यालय में पांचना बांध जल विवाद को लेकर आयोजित बैठक में संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, सवाई माधोपुर जिला कलेक्टर काना राम व अन्य अधिकारी।
Sawai Madhopur और आसपास के कमांड क्षेत्र में पांचना बांध के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में अब एक निर्णायक पहल की गई है। राज्य सरकार के निर्देशों के तहत इस संवेदनशील मुद्दे पर संवाद और सहमति स्थापित करने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिससे किसानों में समाधान की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
भरतपुर संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जल प्रबंधन, नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग तथा कमांड और कैचमेंट क्षेत्र के हितों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सवाई माधोपुर जिला कलेक्टर काना राम, करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा तथा सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसमें पांचना बांध के मौजूदा जल प्रबंधन हालात और क्षेत्रीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
Bharatpur संभागीय आयुक्त ने स्पष्ट किया कि दोनों जिलों के किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान आवश्यक है। इसी क्रम में आगामी गुरुवार, 18 जून को सायं 5 बजे संभागीय आयुक्त कार्यालय में किसान प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों जिलों के किसान प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।
Karauli के जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाते हुए यह निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित कर संवाद के माध्यम से स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। जिला कलेक्टर सवाई माधोपुर काना राम ने किसान प्रतिनिधियों से निर्धारित समय पर बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने की अपील की है, ताकि आपसी सहमति और संवाद के आधार पर इस जल विवाद का ठोस समाधान निकाला जा सके।
यह बैठक न केवल प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, बल्कि क्षेत्रीय किसानों के भविष्य और कृषि निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है। अब सभी की निगाहें 18 जून को होने वाली इस संयुक्त बैठक पर टिकी हैं, जहां से समाधान की दिशा में ठोस परिणाम की उम्मीद की जा रही है।

Pratahkal Bureau
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