पंच गौरव कार्यक्रम से बदलेगी जिलों की पहचान, मुख्य सचिव ने तय किए विकास लक्ष्य
पंच गौरव कार्यक्रम की समीक्षा में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जिलों की पहचान, ब्रांडिंग और विकास लक्ष्यों को लेकर दिए अहम निर्देश।

शासन सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पंच गौरव कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
पंच गौरव कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार ने जिलों की विशिष्ट पहचान को विकास का आधार बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टरों एवं संबंधित नोडल विभागों को कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, परिणाम आधारित कार्ययोजना और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पंच गौरव कार्यक्रम राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की स्थानीय विशेषताओं को संरक्षित, संवर्धित, ब्रांडिंग एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से नई पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, कृषि, पर्यटन, खेल एवं वन संपदा जैसी जिले की विशेषताओं पर विशेष ध्यान देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है, रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा जिलों को व्यापक पहचान मिल सकती है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वर्ष 2024-25 को आधार वर्ष मानते हुए चयनित पंच गौरव कार्यक्रमों के लिए वर्ष 2026-27 के अल्पकालीन, वर्ष 2029-30 के मध्यकालीन तथा वर्ष 2047 के दीर्घकालीन मापनीय लक्ष्य एवं संकेतक निर्धारित किए जाएं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इनकी सूचना समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि कार्यक्रम की प्रगति का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा द्वारा पंच गौरव कार्यक्रम को लेकर दिए गए निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने, जनभागीदारी को बढ़ावा देने, चिन्हित उत्पादों एवं पर्यटन स्थलों की प्रभावी ब्रांडिंग करने तथा स्थानीय मेलों एवं शासकीय आयोजनों में पंच गौरव कार्यक्रम का व्यापक प्रदर्शन करने पर जोर दिया। उन्होंने पुस्तिकाओं एवं अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं संसाधनों का प्रभावी अभिसरण कार्यक्रम की सफलता का आधार है। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडी), विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमएलएएलएडीएस), डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) तथा उद्योग संगठनों के सहयोग का अधिकतम उपयोग करने को कहा।
बैठक में वर्ष 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां समयबद्ध रूप से जारी करने तथा उपलब्ध राशि का उपयोग केवल अनुमन्य एवं उद्देश्यपरक विकास कार्यों में सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के जिला कलेक्टरों से पंच गौरव कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं नवाचारों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इन जिलों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को अन्य जिलों में भी अपनाया जाए, जिससे पूरे प्रदेश में कार्यक्रम का गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
मुख्य सचिव ने खेल विभाग को ग्राम पंचायत स्तर तक खेल प्रतिभाओं की पहचान एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने, उद्योग विभाग को जिला उत्पादों के मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग एवं विपणन में तेजी लाने, वन विभाग को चयनित वनस्पति प्रजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन, कृषि विभाग को स्थानीय कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा पर्यटन विभाग को पर्यटक सुविधाओं एवं पर्यटक अनुभवों में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को कार्यक्रम से जुड़े आंकड़ों का समयबद्ध सत्यापन, डेटा सामंजस्य तथा निर्धारित पोर्टलों पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि नियमित समीक्षा के माध्यम से प्रत्येक जिले की प्रगति की लगातार निगरानी की जाएगी।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग एवं वाणिज्य विभाग श्री शिखर अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री आनन्द कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव खेल एवं युवा मामलात विभाग श्री प्रवीण गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी विभाग श्रीमती मंजू राजपाल, शासन सचिव आयोजना एवं सांख्यिकी विभाग डॉ. रवि कुमार सुरपुर, शासन सचिव पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग श्रीमती शुचि त्यागी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के सभी जिला कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

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