गंगापुर सिटी। शहर में आयोजित चल रही रामकथा का द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अनुपम वातावरण बना रहा, जहां कथावाचक पुष्पमुरारी बापू ने रावण के जीवन चरित्र, शिव–सती प्रसंग तथा रामकथा के आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व पर गहन प्रकाश डाला।

बापू ने रावण के व्यक्तित्व को मात्र शत्रु या खलनायक के रूप में नहीं देखा। उन्होंने कहा कि रावण भगवान नारायण का प्रिय सेवक था और उनके अस्तित्व के बिना रामकथा का यह पावन अवसर भी नहीं मिलता। रावण के जीवन से मिली सीख पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अहंकार किसी भी महान व्यक्तित्व को पतन की ओर ले जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, बापू ने शिव–सती प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अगस्त ऋषि ने शिवकथा सुनाई, जिसे भगवान शिव ने ध्यानपूर्वक सुना, जबकि सती ने शंका के कारण कथा को पूरी गंभीरता से नहीं सुना। बापू ने कहा कि शंकाएँ तभी दूर होती हैं, जब रामकथा को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मन से सुना जाए, क्योंकि रामकथा हर जीवन की उलझनों का समाधान देती है।

कथा के दौरान भजन संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें भक्तजन झूम-झूम कर भक्ति रस में डूब गए। शनिवार के आयोजन में प्रमुख रूप से दीपक, वीरू सिंघल, विष्णु बालोती, गिर्राज वैद्य, शम्भू, श्याम अग्रवाल, महादेव, तारा, गुलाब सिंह चौहान और पुरन मेड़ी सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे। पूरे दिन कथा पंडाल में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभुत्व बना रहा।

कथावाचन के इस आयोजन ने न केवल भक्तों के मन में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाई, बल्कि रामकथा के जीवनदर्शन और नैतिक शिक्षा के महत्व को भी उजागर किया। यह आयोजन गंगापुर सिटी में धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में एक अमूल्य अनुभव के रूप में याद किया जाएगा।

Pratahkal Bureau

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