जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 7 क्लस्टर चिन्हित किए गए हैं, जहां मिशन मोड पर काम शुरू किया जाएगा। किसानों को रासायनिक खादों और दवाओं का उपयोग नहीं करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए तीन माह की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सोमवार को जिला कलक्टर काना राम ने कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और कृषि विस्तार विभागों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।

जिला कलक्टर काना राम ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मिशन शुरू किया है, इसलिए जिले के किसानों के बीच इस दिशा में सबसे अधिक कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि तथा अन्य संबंधित विभागों के धरातल पर कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए पायलट प्रोजेक्ट की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिशन की सफलता के लिए किसानों की प्रभावी समझाइश, गहन प्रशिक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने के दावों की सख्त निगरानी आवश्यक होगी।

बैठक में इस वर्ष कमजोर मानसून और कम बारिश के कारण फसल बुआई में हो रही देरी पर भी चर्चा हुई। जिला कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी एक सप्ताह तक कृषि से जुड़े सभी अधिकारी एवं कार्मिक किसानों के बीच जाकर कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की जानकारी साझा करें और उन्हें तिल तथा बाजरा जैसी फसलें बोने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने खरीफ और रबी फसल सीजन के लिए खाद की आवश्यकता का सही आकलन करने तथा उसके वितरण की योजना समय पर तैयार करने के निर्देश भी दिए। साथ ही कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से कहा कि फार्म पॉण्ड, सिंचाई पाइप, बूंद-बूंद सिंचाई, बगीचों, पॉलीहाउस, शेडनेट तथा फसल प्रदर्शन जैसी योजनाओं के लिए लक्ष्य आवंटन से पहले ही किसानों के आवेदन प्राप्त कर उनका सत्यापन कर लिया जाए, ताकि समय पर लाभ वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

जिला कलक्टर ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आगामी सीजन की तैयारी करने, किसानों को योजना से जोड़ने तथा पिछले सीजन के बीमा मुआवजे के भुगतान की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि बैंक खाते अथवा आधार संख्या सत्यापित नहीं होने सहित किसी भी कारण से किसानों के भुगतान में देरी न हो और चेक बाउंस जैसी स्थिति भी उत्पन्न न हो। यदि किसी किसान को भुगतान नहीं मिला है तो उसकी सहायता कर भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही अगले सीजन के लिए फसल बीमा आवेदन प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

बैठक में संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार लखपत लाल मीना, परियोजना निदेशक आत्मा अमर सिंह, कृषि विज्ञान केन्द्र के भरतलाल मीना सहित उद्यानिकी, कृषि और अन्य संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, जल संरक्षण के अनुरूप फसल चयन, समयबद्ध योजना क्रियान्वयन और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

Pratahkal Bureau

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