सवाई माधोपुर में आज राष्ट्रीय लोक अदालत, आपसी सहमति से सुलझेंगे हजारों विवाद
सवाई माधोपुर न्यायक्षेत्र में 21 दिसम्बर 2025 को चतुर्थ राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। जिले में गठित 10 बैंचों के माध्यम से प्री-लिटीगेशन और लंबित राजीनामा योग्य प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित, सुलभ और निःशुल्क निस्तारण किया जाएगा।

सवाई माधोपुर, 20 दिसम्बर।
न्याय की लंबी प्रक्रिया से जूझ रहे पक्षकारों के लिए राहत की बड़ी पहल करते हुए सवाई माधोपुर न्यायक्षेत्र में रविवार, 21 दिसम्बर 2025 को इस वर्ष की चतुर्थ राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित यह लोक अदालत जिले भर में लंबित और प्री-लिटीगेशन स्तर के राजीनामा योग्य प्रकरणों के त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण निस्तारण का सशक्त मंच बनेगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर की सचिव समीक्षा गौतम ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिले में कुल दस बैंचों का गठन किया गया है। जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर में चार बैंच, गंगापुर सिटी में दो बैंच तथा बौंली, खण्डार, बामनवास एवं चौथ का बरवाड़ा में एक-एक बैंच के माध्यम से मामलों की सुनवाई की जाएगी। इन बैंचों में न्यायालयों में लंबित तथा न्यायालय से पूर्व सुलह योग्य मामलों को आपसी समझाइश और सहमति के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।
लोक अदालत का आयोजन ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी किया जा रहा है, जिससे पक्षकार अपनी सुविधा के अनुसार इसमें भाग ले सकेंगे। लोक अदालतों का मूल उद्देश्य पक्षकारों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवादों और मनमुटाव को समाप्त कर उन्हें त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लिए यह व्यवस्था न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहारा मानी जाती है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, चेक अनादरण से जुड़े विवाद, धन वसूली, कर संबंधी विवाद, उपभोक्ता विवाद, श्रम एवं नियोजन से जुड़े मामले, बिजली-पानी और अन्य सेवाओं के बिल भुगतान से संबंधित विवाद, राजस्व प्रकरण, भरण-पोषण एवं बाल अभिरक्षा जैसे अनेक मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरण, एमएसीटी मामले, वैवाहिक विवाद, भूमि अधिग्रहण, रियल एस्टेट और वाणिज्यिक विवादों के समाधान की भी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार का न्याय शुल्क नहीं लिया जाता और सिविल मामलों में पूर्व में जमा की गई कोर्ट फीस भी वापस की जाती है। लोक अदालत में पारित निर्णय दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होते हैं और इनके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे वर्षों तक चलने वाले मुकदमों पर तत्काल विराम लग जाता है।
राष्ट्रीय लोक अदालत न केवल न्याय व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह समाज में आपसी समझ, सौहार्द और विश्वास को मजबूत करने का भी प्रभावी माध्यम साबित हो रही है।
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