मुनिश्री भरत कुमारजी के दीक्षा रजत जयंती पर सवाई माधोपुर में प्रवचन सभा
आचार्य महाप्रज्ञ के दीक्षा दिवस और मुनिश्री भरत कुमार के 25वें दीक्षा वर्ष पर आयोजित सभा के बाद मुनि वृंद का लाडनूं के लिए 400 किमी का पद विहार शुरू हुआ।

सवाई माधोपुर के आदर्श नगर स्थित तेरापंथ भवन में मुनिश्री अर्हत कुमारजी के सानिध्य में आयोजित प्रवचन सभा के दौरान उपस्थित श्रावक-श्राविकाएं और मुनि वृंद।
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के विद्वान सुशिष्य मुनिश्री अर्हत कुमारजी के सानिध्य में तेरापंथ के दशम अधिष्ठाता प्रेक्षाप्रणेता आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के दीक्षा दिवस पर आदर्शनगर स्थित तेरापंथ भवन में विशेष प्रवचन सभा का आयोजन किया गया। आज ही के दिन 25 वर्ष पूर्व मुनिश्री के सहवर्ती संत मुनिश्री भरत कुमारजी की दीक्षा भी आचार्य महाप्रज्ञजी के कर कमलों से हुई थी।
मुनिश्री अर्हत कुमारजी का पावन पाथेय
मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने इस अवसर पर प्रेरणा देते हुए फरमाया कि:
- "संयम ग्रहण करने से आश्रव द्वार बंद हो जाते है।"
- "एक घड़ी का शुद्ध संयम मोक्ष मार्ग के द्वार खोल देता है।"
- "दीक्षा रूपांतरण की अभिनव प्रक्रिया है।"
- "संयम की प्राप्ति केवल मनुष्य जन्म में ही प्राप्त होती है इसलिए वह जीव भाग्यवान होता है जो संयम लेकर सीमित सुखों को त्यागकर अनंत सुखों का वरण करता है।"
- "जैन साधु की पहचान केवल केश लुंचन से नहीं बल्कि क्लेश लुंचन से हो यही अपेक्षित है।"
- "महाप्रज्ञजी जैसे महामनस्वी आचार्य के कर कमलों से दीक्षित भरत मुनि अध्यात्म की ऊंचाइयों का वरण करें यही काम्य है।"
मुनिश्री भरत कुमारजी की भावाभिव्यक्ति
अपनी दीक्षा की 25वें वर्ष की परिसंपन्नता के अवसर पर भरत मुनि ने अपने दीक्षा गुरु, वर्तमान आचार्य, अर्हत मुनि, जयदीप मुनि सहित माता पिता व संयम ग्रहण में सहयोगी व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया व कहा कि:
- "एक छोटा सा त्याग भी जीवन बदल सकता है।"
- "एक साधु के पास संयम रूपी अक्षय निधि होती है उसका संरक्षण व सार संभाल आवश्यक है।"
मुनिश्री जयदीप कुमारजी के विचार
मुनिश्री जयदीप कुमारजी ने इस अवसर पर कहा कि:
- "भरत मुनि हंसमुख, मृदुभाषी व सदा नित नए के अभिलाषी है।"
- "संयम के पथ पर वही चलता जो जागरूक, सहिष्णु व आत्मा के निकट रहने वाला हो।"
- "गुरुओं के दिशा बोध से व्यक्ति अनंत सुखों को प्राप्त कर सकता है।"
जप-तप, नियम ग्रहण एवं पद विहार
- श्रावक श्राविकाओं ने जप तप के माध्यम से गुरु महाप्रज्ञ व भरत मुनि की वर्धापन की व एक साल के लिए त्याग तप को समर्पित नियम ग्रहण किए।
- मुनि बृंद सवाई माधोपुर क्षेत्र में लगभग एक माह का प्रवास पूर्ण कर गुरु आज्ञा के अनुरूप लाडनूं के लिए प्रस्थिति हुए।
- वे सूरवाल, भगवतगढ़, चौथ का बरवाड़ा, जयपुर होते हुए 400 किलोमीटर का पद विहार करते हुए लाडनूं पधारेंगे।

Pratahkal Bureau
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