नई दिल्ली/जयपुर, 03 दिसंबर 2025: टोंक–सवाई माधोपुर के सांसद हरीश चन्द्र मीना ने रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व में मई 2025 में हुई रात्रिकालीन गतिविधियों और कृत्रिम रोशनी के उपयोग को लेकर उठाए गए अपने प्रश्न संख्या 192 पर वन मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर पर गंभीर आपत्ति जताई है। सांसद ने इसे तथ्यों से परे, अधूरा और भ्रामक करार देते हुए लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री श्री किरण रिजीजू से मिलकर मामले की पुनः जांच और सटीक तथ्य प्रस्तुत करने की मांग की है।

सांसद मीना ने बताया कि उन्होंने प्रश्न में रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व में रात्रि में सफारी, तेज रोशनी के उपयोग और NTCA (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) के 2012 के दिशा-निर्देशों के संभावित उल्लंघन संबंधी गंभीर मुद्दे उठाए थे। हालांकि वन मंत्रालय के उत्तर में न तो वास्तविक घटनाओं का उल्लेख किया गया, और न ही मीडिया रिपोर्ट्स, वीडियो फुटेज और स्थानीय वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा पुष्ट किए गए तथ्यों को शामिल किया गया।

मंत्रालय ने उत्तर में यह कहा कि सफारी समय बढ़ाया नहीं गया, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया में प्रकाशित वीडियो, स्थानीय गाइड्स और पर्यटकों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि रात में वाहनों की आवाजाही हुई और बाघों के दृष्टिगोचर होने पर तेज रोशनी का इस्तेमाल किया गया, जो NTCA दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इसके अलावा, इस तरह की गतिविधियों और शिकायतों की लंबी अवधि से रिपोर्टिंग हो रही है, लेकिन मंत्रालय ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।

सांसद मीना ने विशेष रूप से वन मंत्रालय की मौन नीति पर चिंता जताई, क्योंकि उन्होंने यह जानना चाहा था कि क्या NTCA दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ और क्या इसके लिए कोई कार्रवाई की गई। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि प्रश्न संख्या 192 के उत्तर की पुनः समीक्षा की जाए और संबंधित मंत्रालय को निर्देशित किया जाए कि वह सदन में प्रमाणित, सटीक और पूर्ण जानकारी पेश करे। इसके अलावा, रणथम्भौर में रात्रिकालीन गतिविधियों, मीडिया रिपोर्टों, NTCA गाइडलाइनों के उल्लंघन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराकर सदन को अवगत कराया जाए।

सांसद मीना ने कहा, “टाइगर संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि भारत की पहचान और गौरव से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। ऐसे संवेदनशील विषय पर अधूरा और भ्रामक उत्तर न केवल सदन की मर्यादा को आहत करता है, बल्कि संरक्षण प्रयासों को भी कमजोर करता है।”

सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस पहल को वन्यजीव संरक्षण के प्रति सांसद की सक्रियता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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