पालीघाट में वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने छोड़े 30 घड़ियाल: चम्बल नदी में वन्यजीव संरक्षण का नया अध्याय
सवाई माधोपुर के पालीघाट में वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने 30 घड़ियालों को चम्बल नदी में प्राकृतिक आवास में छोड़ा। राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य में यह पुनर्वास कार्यक्रम राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण और नदी पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में नई पहल साबित हुआ।

सवाई माधोपुर, 13 नवम्बर।
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के पालीघाट में गुरुवार का दिन वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नई पहल के रूप में दर्ज हुआ, जब राज्य के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य का दौरा कर 30 घड़ियाल हैचलिंग्स को उनके प्राकृतिक आवास चम्बल नदी में पुनर्वासित किया। यह पहल राज्य में जैव विविधता संरक्षण और नदी पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राज्यमंत्री शर्मा ने इस अवसर पर घड़ियाल पालन केंद्र का विस्तृत अवलोकन किया और वहां चल रहे घड़ियाल रेयरिंग फास्ट ट्रैक–हेड स्टार्टिंग कार्यक्रम की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चम्बल नदी का पारिस्थितिक तंत्र घड़ियालों की उपस्थिति से ही पूर्ण होता है और इस दिशा में हो रहा कार्य प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है।
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) राजेश गुप्ता, तथा उप वन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक (प्रथम), रणथम्भौर बाघ परियोजना डॉ. रामानंद भाकर उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने घड़ियालों के संरक्षण हेतु अपनाई जा रही नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक प्रजनन प्रक्रिया की समीक्षा की।
श्री शर्मा ने अभयारण्य की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पालीघाट में जिस प्रकार संरक्षण कार्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लागू किया गया है, उसी मॉडल को धौलपुर एवं अन्य चम्बल तटीय क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के लिए ठोस नीतियों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर विशेष ध्यान दे रही है।
पालीघाट में छोड़े गए ये 30 घड़ियाल हैचलिंग्स पांच माह की उम्र के हैं, जिन्हें पालन केंद्र में सुरक्षित रखकर प्रशिक्षित किया गया था। अब इन्हें प्राकृतिक प्रवाह वाली चम्बल नदी में छोड़कर पुनर्वास प्रक्रिया को गति दी गई है। इस प्रयास से न केवल घड़ियाल प्रजाति की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि नदी तंत्र में संतुलन भी मजबूत होगा।
इस ऐतिहासिक पहल के साथ राजस्थान ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। चम्बल के जल में लौटते घड़ियाल अब राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और संरक्षण भावना के जीवंत प्रतीक बनकर उभर रहे हैं।
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Pratahkal Bureau
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