डॉक्टरों की बढ़ती संख्या के बीच क्या मजबूत हो रहा है भारत का स्वास्थ्य तंत्र? डॉ. सुमीत गर्ग ने उठाए अहम सवाल
डॉ. सुमीत गर्ग ने भारत में बढ़ते मेडिकल कॉलेजों, डॉक्टरों की संख्या, स्वास्थ्य ढांचे, रोजगार और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए अहम सुझाव दिए।

तस्वीर में एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (राजस्थान चैप्टर) के वाइस चेयरमैन डॉ. सुमीत गर्ग मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं।
देश में चिकित्सा शिक्षा के तेजी से विस्तार के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक मजबूती को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (राजस्थान चैप्टर) के वाइस चेयरमैन डॉ. सुमीत गर्ग ने अपने लेख में कहा है कि भारत में 850 से अधिक मेडिकल कॉलेज और लगभग 1.37 लाख एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होना ऐतिहासिक उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य ढांचे, रोजगार और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
डॉ. गर्ग ने कहा कि देश में हर वर्ष करीब 1.30 लाख नए एमबीबीएस चिकित्सक तैयार हो रहे हैं, जबकि पीजी और सुपर स्पेशियलिटी की सीटें अपेक्षाकृत बहुत कम हैं। इसके कारण हजारों युवा डॉक्टर विशेषज्ञ बनने से वंचित रह जाते हैं और कई को निजी अस्पतालों में कम वेतन पर कार्य करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के हजारों पद रिक्त हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी लगातार बनी हुई है।
उन्होंने अपने लेख में कहा कि भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 1.4 से 1.9 प्रतिशत खर्च करता है, जो कई विकासशील देशों और ब्रिक्स देशों के औसत से काफी कम है। इसका परिणाम यह है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा खर्च आज भी आम नागरिकों को अपनी जेब से वहन करना पड़ता है।
डॉ. सुमीत गर्ग के अनुसार चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल डॉक्टर तैयार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान के अवसर और सम्मानजनक कार्य वातावरण भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ती रहे, लेकिन शिक्षण अस्पताल, फैकल्टी, अनुसंधान सुविधाएं और रोजगार के अवसर समान गति से विकसित नहीं हों, तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय को चरणबद्ध तरीके से जीडीपी के कम से कम 3 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए। इसके साथ ही पीजी एवं सुपर स्पेशियलिटी सीटों का विस्तार, सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, निजी अस्पतालों में एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारण तथा ग्रामीण सेवा को आकर्षक बनाने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल हेल्थ और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
लेख के अंत में डॉ. सुमीत गर्ग ने कहा कि विकसित भारत की पहचान केवल आर्थिक या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि स्वस्थ नागरिकों, सम्मानित चिकित्सकों और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पर किया गया निवेश राष्ट्र के भविष्य में निवेश है और इसे राष्ट्रीय विकास की केंद्रीय धुरी बनाया जाना चाहिए।

Madan Mohan Garg(Gangapur City)
नाम: मदन मोहन गर्ग
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (दैनिक प्रातःकाल, गंगापुर सिटी)
कार्यक्षेत्र: गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र सहित सवाई माधोपुर और करौली जिला
बीट: प्रशासनिक समाचार, सामाजिक कार्यक्रम, जनसमस्याएं एवं सभी क्षेत्र
परिचय
मदन मोहन गर्ग राजस्थान के गंगापुर सिटी क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'दैनिक प्रातःकाल' में गंगापुर सिटी के ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र गंगापुर सिटी विधानसभा सहित सवाई माधोपुर और करौली जिला है। वह स्थानीय जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक कार्यक्रमों सहित सभी क्षेत्रों की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
मदन मोहन गर्ग को क्षेत्रीय पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। वह साल 2015 से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र में समाचार संकलन व ब्यूरो संचालन का कार्य संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
वह उच्च शिक्षित हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता इस प्रकार है:
- बी.ए. (B.A.) और बी.एड. (B.Ed.)
- एम.ए. (M.A.) और एम.एड. (M.Ed. - मास्टर ऑफ एजुकेशन)
