मलारना डूंगर क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितता उजागर हुई है, जहां मान्यता प्राप्त स्थान से अलग स्थान पर विद्यालय संचालन के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।

शिवाजी विद्यापीठ उच्च प्राथमिक विद्यालय मलारना चौढ की मान्यता मलारना चौढ के लिए स्वीकृत थी, लेकिन विद्यालय के निमोद में संचालित होने की शिकायत कार्यालय को प्राप्त हुई। इस पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मलारना डूंगर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कार्यालय द्वारा संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

जांच में सामने आया कि संस्था ने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए स्थान परिवर्तन कर विद्यालय को दूसरे स्थान पर संचालित किया। आरटीई नियमों के तहत मूल स्थान मलारना चौढ के बजाय निमोद में संचालन कर बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। साथ ही वर्ष 2021-22 से आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश भी नहीं दिया गया।

इस संबंध में संस्था से जवाब मांगा गया, लेकिन प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद संस्था के मालिक को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक देवीलाल मीना ने स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण किया, जिसमें सभी आरोप सत्य पाए गए।

उक्त तथ्यों के आधार पर संस्था के खिलाफ राजस्थान गैर सरकारी शैक्षणिक संस्था अधिनियम 1989, नियम 1993 एवं संशोधित नियम 2011 के नियम 7 के (क) और (ग) के तहत कार्रवाई करते हुए बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति स्थान परिवर्तन करने तथा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोप में विद्यालय की मान्यता समाप्त करने का प्रस्ताव निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर को भिजवाया गया है।

यह कार्रवाई क्षेत्र में शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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