हिंडौन सिटी उपकारागृह की सुरक्षा में बड़ी चूक: झाड़ू लगाते-लगाते छत के रास्ते फिल्मी अंदाज में फरार हुआ विचाराधीन बंदी
हिंडौन सिटी उपकारागृह से विचाराधीन बंदी शकील खान सुरक्षा घेरा तोड़कर फिल्मी अंदाज में फरार हो गया। सुबह 11 बजे झाड़ू लगाते समय छत के रास्ते पेड़ के सहारे भागे बंदी की तलाश में एसडीएम और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। जानें सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक और पुलिस की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट।

हिंडौन सिटी। राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन सिटी उपकारागृह से सुरक्षा व्यवस्थाओं को धता बताते हुए एक विचाराधीन बंदी के फरार होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुरुवार सुबह जेल प्रशासन की लापरवाही का फायदा उठाकर एक बंदी शातिराना तरीके से छत के रास्ते कूदकर रफूचक्कर हो गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना ने जेल की सुरक्षा दीवार और प्रहरियों की सतर्कता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जेल परिसर जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र से बंदी का इस तरह गायब होना पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाला साबित हुआ है।
घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, फरार बंदी की पहचान टोडाभीम के काजीपाड़ा निवासी शकील खान के रूप में हुई है। शकील को महज दो दिन पूर्व, 20 जनवरी को जुआ और सट्टे के एक मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में हिंडौन सिटी उपकारागृह भेजा गया था। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे जब जेल के चौक में नियमित साफ-सफाई का कार्य चल रहा था, तभी शकील खान ने प्रहरियों की नजरों से बचकर भागने की योजना को अंजाम दिया। उसने सफाई के दौरान अचानक जेल के चौक से छत की ओर रुख किया और वहां से एक पेड़ के सहारे नीचे उतरकर भागने में सफल रहा।
जैसे ही बंदी के फरार होने की सूचना जेल प्रशासन को मिली, समूचे महकमे में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस के आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम हेमराज गुर्जर, एडिशनल एसपी सत्येंद्र पाल और डीएसपी मनीष कुमार मीणा ने जेल का मुआयना किया और मौके पर मौजूद कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की। अधिकारियों ने उस मार्ग का भी निरीक्षण किया जहां से बंदी फरार हुआ था।
वर्तमान में पुलिस ने पूरे शहर और आसपास के इलाकों में नाकाबंदी कर दी है और फरार शकील खान की तलाश में टीमें रवाना कर दी गई हैं। जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में विभागीय जांच के भी संकेत दिए गए हैं कि आखिर सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगी। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है, बल्कि जेलों के भीतर बंदियों की निगरानी प्रणाली की मजबूती पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही है।

Pratahkal Bureau
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