चौथ का बरवाड़ा में 12 जनवरी से आयुर्वेद का महाकुंभ: बिना चीर-फाड़ जटिल गुदा रोगों का होगा स्थायी उपचार
सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा में 12 से 21 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले 10 दिवसीय निःशुल्क आयुर्वेद क्षार सूत्र शिविर की पूरी जानकारी। विधायक जितेन्द्र गोठवाल करेंगे उद्घाटन। डॉ. विजय शंकर बैरवा के नेतृत्व में विशेषज्ञ करेंगे बवासीर, भगन्दर और फिशर का बिना चीर-फाड़ स्थायी इलाज। मरीजों के लिए भोजन और आवास की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध।

सवाई माधोपुर। चिकित्सा जगत की प्राचीन और सबसे प्रभावी पद्धतियों में शुमार आयुर्वेद अब सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में असाध्य रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आ रहा है। आगामी 12 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक मीणा धर्मशाला में एक भव्य 10 दिवसीय आवासीय निःशुल्क अंतरंग आयुर्वेद क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह जिलास्तरीय शिविर न केवल स्वास्थ्य लाभ का केंद्र बनेगा, बल्कि आयुर्वेद की उस विशेषज्ञता को भी आमजन तक पहुंचाएगा जो बिना किसी बड़े ऑपरेशन या चीर-फाड़ के जटिल से जटिल रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखती है।
इस चिकित्सा महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ खण्डार विधायक माननीय जितेन्द्र गोठवाल के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा। शिविर की तैयारियों और इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सहायक शिविर प्रभारी डॉ. विजय शंकर बैरवा ने बताया कि इस 10 दिवसीय आयोजन में राजस्थान आयुर्वेद विभाग के बेहद अनुभवी और विशेषज्ञ शल्य चिकित्सकों की टीम अपनी सेवाएं देगी। इस शिविर का मुख्य आकर्षण 'क्षार सूत्र' पद्धति होगी, जिसे आधुनिक शल्य चिकित्सा के विकल्प के रूप में गुदा रोगों के लिए सबसे सुरक्षित और स्थायी समाधान माना जाता है।
शिविर का प्राथमिक केंद्र अर्श यानी बवासीर, भगन्दर (फिस्टुला), परिकर्तिका (फिशर) और नाड़ी व्रण जैसे रोगों का उपचार करना है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति गुदा मार्ग से रक्तस्राव, असहनीय दर्द, सूजन, जलन, फोड़ा, मवाद या लंबे समय से बनी रहने वाली कब्ज जैसी समस्याओं से त्रस्त है, तो यह शिविर उनके लिए एक वरदान साबित होगा। क्षार सूत्र की विशेषता यह है कि इसमें मरीज को पारंपरिक सर्जरी की तरह लंबे समय तक बिस्तर पर नहीं रहना पड़ता और रोग की पुनरावृत्ति की संभावना भी न्यूनतम हो जाती है।
शिविर का दायरा केवल गुदा रोगों तक ही सीमित नहीं है। इसमें महिला स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, कटिशूल, कष्टार्तव और रक्ताल्पता जैसी समस्याओं का निदान किया जाएगा। साथ ही, बदलते मौसम के साथ होने वाली बीमारियों जैसे दमा, खांसी, सर्दी और वात रोगों (गठिया) के लिए भी विशेष परामर्श और दवाइयां उपलब्ध रहेंगी। चिकित्सा की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए शिविर में अग्निकर्म, रक्तमोक्षण और पंचकर्म जैसी विशिष्ट विधाओं का प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ ही योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष सत्र आयोजित होंगे।
मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि रखते हुए, आयोजकों ने शिविर में भर्ती होने वाले सभी रोगियों के लिए आवास, भोजन, बिस्तर और औषधियों की पूर्णतः निःशुल्क व्यवस्था की है। मरीजों को केवल अपने भोजन के बर्तन साथ लाने का परामर्श दिया गया है। आयोजन समिति ने क्षेत्र के समस्त जरूरतमंद नागरिकों से इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाने की अपील की है ताकि वे आयुर्वेद की प्राचीन शक्ति के माध्यम से एक रोगमुक्त जीवन की शुरुआत कर सकें।

Pratahkal Bureau
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