प्रदेश के कुछ जिलों में लम्पी स्किन रोग (गांठदार त्वचा रोग) के प्रमाण मिलने के बाद सवाई माधोपुर जिले में पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। भरतपुर संभाग के भरतपुर एवं डीग जिलों में रोग पाए जाने के मद्देनजर विभाग ने जिले में रोग की रोकथाम और प्रभावी निगरानी के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं।

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि जिले की सभी विभागीय संस्थाओं को गौशालाओं एवं पशुपालकों के बाड़ों में मच्छर, मक्खी एवं चींचड़ आदि रक्तचूषक कीटों की रोकथाम के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम गठित की गई है। इसके साथ ही जिला पशुपालन कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम के प्रभारी डॉ. राजेश रोशन मीणा हैं, जिनसे मोबाइल नंबर 9636980734 पर संपर्क किया जा सकता है।

डॉ. गर्ग ने बताया कि जिले की सभी गौशालाओं में गौवंश को लम्पी स्किन रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि पशुपालकों के घरों में गौवंश का टीकाकरण कार्य जारी है। उन्होंने पशुपालकों को नजदीकी प्रभावित जिलों से पशु खरीदकर जिले में नहीं लाने की हिदायत दी है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं की आवाजाही से बचने की अपील की है।

लम्पी स्किन रोग गौवंश में होने वाला वायरस जनित संक्रामक रोग है। संक्रमित पशु के शरीर पर विशेषकर सिर, गर्दन एवं जननांगों के आसपास गांठें बनने लगती हैं। ये गांठें धीरे-धीरे बड़ी होकर फूटने के बाद घाव में परिवर्तित हो सकती हैं। त्वचा ढीली पड़ने, तेज बुखार आने तथा दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम होने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में मादा पशुओं का गर्भपात तथा पशु की मृत्यु भी हो सकती है।

रोग का प्रसार मच्छर, काटने वाली मक्खी, जूं एवं चींचड़ जैसे रक्तचूषक कीटों के माध्यम से होने के साथ रोगी पशु के संपर्क तथा संक्रमित चारे-पानी आदि से भी हो सकता है।

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से फार्म एवं बाड़े में जैव सुरक्षा अपनाने की अपील की है। प्रभावित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखकर उसके लिए चारा-पानी एवं उपचार की व्यवस्था करने तथा उसे चरने के लिए अन्यत्र नहीं भेजने की सलाह दी गई है। बाड़े में मच्छर, मक्खी एवं चींचड़ नियंत्रण के लिए नियमित कीटनाशक छिड़काव करने और प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं की आवाजाही से बचने के लिए भी कहा गया है।

डॉ. राजीव गर्ग ने कहा कि यदि किसी गौवंश में लम्पी स्किन रोग के लक्षण दिखाई दें तो घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर आवश्यक उपचार करवाएं। उन्होंने बताया कि रोग से संक्रमित पशु का उपचार संभव है। जिले में रैपिड रिस्पॉन्स टीम, कंट्रोल रूम और टीकाकरण अभियान के जरिए विभाग ने रोग की निगरानी और रोकथाम के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।

Pratahkal Newsroom

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