सवाई माधोपुर के शिक्षण संस्थानों में गूंजा जीवन बचाने का मंत्र: विद्यार्थी बनेंगे संकट के समय 'देवदूत', सीख रहे सीपीआर के गुर
सवाई माधोपुर के विद्यालयों और महाविद्यालयों में चिकित्सा विभाग द्वारा विशेष सीपीआर प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। 'जीवन रक्षक' कौशल के माध्यम से विद्यार्थी अब हार्ट अटैक और सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में जान बचाने के गुर सीख रहे हैं। जानें कैसे यह विशेष ट्रेनिंग और 'गोल्डन आवर' की समझ सवाई माधोपुर के युवाओं को संकट के समय का 'देवदूत' बना रही है।

सवाई माधोपुर। मौत और जिंदगी के बीच के फासले को महज चंद मिनटों की सूझबूझ से पाटा जा सकता है, और इसी संकल्प के साथ सवाई माधोपुर के युवा अब 'जीवन रक्षक' की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहे हैं। जिले के विद्यालयों और महाविद्यालयों में इन दिनों एक ऐसी मुहिम चल रही है, जो न केवल विद्यार्थियों को सशक्त बना रही है, बल्कि समाज के लिए सुरक्षा कवच भी तैयार कर रही है। राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार, जिले भर के शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विशेष 'जीवन रक्षक' कौशल का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सवाई माधोपुर की गलियों से लेकर बड़े शिक्षण परिसरों तक, हर जगह चर्चा उस तकनीक की है जो ठहरती सांसों को दोबारा गति दे सकती है। चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ कार्मिकों द्वारा आयोजित इन सत्रों में 'कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन' यानी सीपीआर को केंद्र में रखा गया है। यह वह आपातकालीन प्रक्रिया है, जो दिल की धड़कन रुकने या सांस थमने जैसी भयावह स्थिति में छाती को दबाकर और कृत्रिम सांस देकर शरीर में ऑक्सीजन और रक्त का संचार बनाए रखती है। प्रशिक्षण के दौरान यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि यह कौशल केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आम छात्र भी सही प्रशिक्षण पाकर किसी मरते हुए व्यक्ति को नई जिंदगी दे सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सा टीम ने 'गोल्डन आवर' की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना या अचानक आए हार्ट अटैक के शुरुआती मिनट सबसे अधिक कीमती होते हैं। यदि मौके पर मौजूद कोई भी सजग नागरिक सही तकनीक से सीपीआर दे दे, तो व्यक्ति के पुनर्जीवित होने की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। इस विशेष अभियान में केवल सामान्य तकनीक ही नहीं, बल्कि गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं जैसी नाजुक स्थितियों के लिए विशेष सावधानियों और प्रक्रियाओं का भी विस्तृत ज्ञान दिया गया। इसके अलावा, सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को सुरक्षित तरीके से वाहन से बाहर निकालने के व्यावहारिक पहलुओं पर भी जोर दिया गया।
इस अभियान की सबसे प्रभावशाली कड़ी रही 'हैंड्स-ऑन' प्रैक्टिस। छात्रों ने केवल सुना और देखा ही नहीं, बल्कि स्वयं लाइव प्रदर्शन के माध्यम से चेस्ट कंप्रेशन की सही गहराई और गति का अभ्यास किया। चिकित्सा विभाग के कार्मिकों ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी यह समझ सके कि संकट के समय घबराने के बजाय किस तरह धैर्य और तकनीक का समन्वय करना है। यह प्रशिक्षण केवल एक कौशल का हस्तांतरण नहीं, बल्कि सवाई माधोपुर के भविष्य को मानवीय संवेदनाओं और तत्परता से लैस करने की एक बड़ी पहल है, जो आने वाले समय में जिले की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली में मील का पत्थर साबित होगी।

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