कोटा: वेस्ट सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन को बड़ा झटका, पदाधिकारियों ने थामा मजदूर संघ का दामन
कोटा में वेस्ट सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन को लगा बड़ा झटका, राजेश मीणा और महेंद्र सिंह मीणा सहित दर्जनों पदाधिकारियों ने अब्दुल खालीक के नेतृत्व में वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ की सदस्यता ली। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की लड़ाई को और तेज करने के संकल्प के साथ पदाधिकारियों ने मज़दूर संघ की नीतियों पर जताया भरोसा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे में रेल कर्मचारियों के हक की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। रेल मंडल में मज़दूर राजनीति की हलचल के बीच वेस्ट सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके कई प्रमुख पदाधिकारियों ने संगठन का साथ छोड़कर वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ की सदस्यता ग्रहण कर ली। मजदूर संघ की नीतियों और कर्मचारी हित में किए जा रहे कार्यों से प्रभावित होकर इन पदाधिकारियों ने मंडल सचिव अब्दुल खालीक के नेतृत्व में अटूट विश्वास प्रकट करते हुए 'मजदूर संघ' परिवार में शामिल होने का निर्णय लिया।
मंडल कार्यालय में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान मंडल सचिव अब्दुल खालीक ने नवागत साथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को संगठन की पारंपरिक 'तिरंगी पट्टी' पहनाकर विधिवत रूप से मजदूर संघ की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर माहौल पूरी तरह से उत्साहजनक रहा और मज़दूर संघ की एकता के नारे गूंज उठे।
मजदूर संघ का दामन थामने वाले पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान में 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) की बहाली रेल कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा कि वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ जिस प्रखरता और ईमानदारी के साथ पुरानी पेंशन की लड़ाई लड़ रहा है, उसने हमें बेहद प्रभावित किया है। इसी संघर्ष को मजबूती देने और रेलकर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करने के ध्येय से सभी साथियों ने सामूहिक रूप से मजदूर संघ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है।
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के दौरान वर्कर्स यूनियन छोड़कर आने वाले प्रमुख पदाधिकारियों में राजेश मीणा, कुंजीलाल मीणा, आराम सिंह मीणा, हंसराज मीणा, राजेश मीणा (अन्य), मनराज और महेंद्र सिंह मीणा सहित एक दर्जन से अधिक पदाधिकारी मौजूद रहे। इन सभी ने एक सुर में अब्दुल खालीक के कुशल नेतृत्व की सराहना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पदाधिकारियों का पलायन आगामी दिनों में रेलवे मंडल की कर्मचारी राजनीति और आगामी निर्वाचनों में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। यह विलय न केवल मजदूर संघ की ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन को भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

Pratahkal Bureau
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