कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए एक बेहद प्रभावशाली और संवेदनशील कदम उठाया है। मंडल रेल प्रबंधक श्री अनिल कालरा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित यह विशेष जागरूकता कार्यशाला केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि उन हजारों रेल कर्मचारियों के जीवन को सुरक्षित करने का एक महा-अभियान बनकर उभरी है, जो दिन-रात पटरियों और रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। इंजीनियरिंग विभाग के डिविजनल ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित इस कार्यशाला ने तनाव मुक्त जीवन और नशे के अंधेरे रास्तों से बाहर निकलने का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य केंद्र रेल कर्मचारियों को उन मानसिक और शारीरिक खतरों से आगाह करना था, जो नशे की लत के कारण उनके भविष्य को अंधकारमय बना सकते हैं। कार्यशाला में इंजीनियरिंग विभाग के ट्रैकमैन, तकनीशियन, वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (SSE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) सहित 70 से अधिक जांबाज कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. दीपक गुप्ता (भारत विकास परिषद), ने अपने संबोधन में नशे की परिभाषा को विस्तार देते हुए कहा कि नशा केवल शराब तक सीमित नहीं है। उन्होंने तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, भांग और गांजा जैसे पदार्थों को 'धीमा जहर' करार दिया, जो न केवल फेफड़ों और धमनियों को खोखला करते हैं, बल्कि व्यक्ति की निर्णय लेने की मानसिक क्षमता को भी नष्ट कर देते हैं।

डॉ. दीपक गुप्ता ने गहराई से समझाया कि नशे की लत अक्सर दोस्तों के आग्रह या सामाजिक दबाव में शुरू होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर मानसिक रोग का रूप ले लेती है। उन्होंने चेतावनी दी कि धूम्रपान से शरीर की नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, उन्होंने एक सकारात्मक उम्मीद भी जगाई कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और परिवार का साथ मिले, तो चिकित्सीय परामर्श के जरिए किसी भी स्तर की लत को छोड़ा जा सकता है।

कार्यक्रम के भावुक क्षण तब आए जब वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीषा शर्मा ने जीवन की अनमोलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित सभी रेल कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक रेल कर्मचारी का स्वस्थ रहना न केवल उसके परिवार के लिए, बल्कि पूरी रेल सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उनके नेतृत्व में सभी 70 कर्मचारियों ने एक सुर में नशा मुक्त रहने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की शपथ ली। कोटा रेल मंडल द्वारा उठाया गया यह कदम यह संदेश देता है कि जब कर्मचारी मानसिक रूप से सशक्त और नशे से मुक्त होगा, तभी भारतीय रेलवे विकास की पटरियों पर और अधिक तेजी व सुरक्षा के साथ दौड़ सकेगी।

Pratahkal Bureau

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