कोटा। भारतीय रेल की धमनियों में सुरक्षा और कर्तव्यनिष्ठा का संचार करने वाले कर्मयोगियों में अब कोटा मंडल के एक जांबाज का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। रेल संरक्षा और तकनीकी दक्षता की कसौटी पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पश्चिम मध्य रेलवे, कोटा मंडल के वरिष्ठ खंड अभियंता श्री पीयूष शर्मा को वर्ष 2025 के 'अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार' (राष्ट्रीय) के लिए चुना गया है। यह गौरवपूर्ण क्षण न केवल कोटा मंडल के लिए बल्कि पूरे पश्चिम मध्य रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने राष्ट्रीय पटल पर अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है।

इस सम्मान की गूँज आगामी 9 जनवरी 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली में सुनाई देगी। द्वारका स्थित भव्य इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर 'यशोभूमि' में आयोजित होने वाले एक गरिमामय समारोह में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा चयनित रेलकर्मियों को अलंकृत किया जाएगा। देशभर के 17 रेलवे जोनों और विभिन्न उत्पादन इकाइयों से चयनित मात्र 100 उत्कृष्ट रेलकर्मियों की फेहरिस्त में पीयूष शर्मा का नाम शामिल होना उनकी असाधारण सूझबूझ और समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए बताया कि पीयूष शर्मा को यह सम्मान उनके द्वारा प्रदर्शित त्वरित निर्णय क्षमता और विषम परिस्थितियों में रेल परिचालन को सुरक्षित बनाने के लिए दिया जा रहा है। इस उपलब्धि के पीछे साहस और सतर्कता की वह कहानी है, जिसने सैकड़ों परिवारों के चिरागों को बुझने से बचा लिया। 3 सितंबर 2025 की वह तारीख आज भी रेल इतिहास में दर्ज है, जब कँवलपुरा–दरा रेलखंड पर कुदरत का कहर भीषण वर्षा के रूप में बरपा था।

मूसलाधार बारिश के कारण रेल पटरियों पर भारी मलबा आ गया था और जलभराव की स्थिति भयावह हो गई थी। उस चुनौतीपूर्ण क्षण में वरिष्ठ खंड अभियंता पीयूष शर्मा ने अपनी जान की परवाह किए बिना असाधारण नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पलक झपकते ही विद्युत आपूर्ति कटवाई और ट्रेन परिचालन को रुकवा दिया। यदि उस समय उनके द्वारा यह सटीक और साहसी निर्णय न लिया जाता, तो एक भीषण रेल दुर्घटना घटित हो सकती थी। उनके इस समयोचित हस्तक्षेप ने न केवल करोड़ों की रेल संपत्ति की रक्षा की, बल्कि ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों को एक सुरक्षित जीवन दान दिया।

यह पुरस्कार केवल एक प्रमाण पत्र या पदक मात्र नहीं है, बल्कि उस निष्ठा का सम्मान है जो हर मौसम और हर परिस्थिति में देश की पटरियों को सुरक्षित रखती है। नवाचार और तकनीकी प्रवीणता के उच्चतम मानकों को स्थापित करने वाले पीयूष शर्मा जैसे अधिकारी आज के रेलकर्मियों के लिए प्रेरणापुंज बनकर उभरे हैं। 9 जनवरी का सूर्य जब दिल्ली के आसमान में चमकेगा, तब कोटा का यह गौरव अपनी कर्मठता की चमक से पूरे देश को गौरवान्वित करेगा।

Pratahkal Bureau

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