कोमल मीना ने आरएएस 2024 में एसटी वर्ग में हासिल की 22वीं रैंक
करौली के सपोटरा की कोमल मीना ने बिना कोचिंग स्वाध्याय के बल पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा में पाई सफलता, अब बनेंगी तहसीलदार।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) कार्यालय के बाहर खड़ी कोमल मीना, जिन्होंने आरएएस 2024 परीक्षा में एसटी वर्ग में 22वीं रैंक प्राप्त की है।
सपोटरा (करौली)। करौली जिले के सपोटरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लेदिया स्थित गांव खेड़ा की बेटी कोमल मीना ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) 2024 के परिणाम में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर समूचे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मी कोमल ने एसटी वर्ग में 22वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वर्तमान में वह जयपुर स्थित कृषि पंत भवन में कनिष्ठ विपणन अधिकारी के पद पर सेवाएं दे रही हैं, जहां उन्होंने मात्र एक माह पूर्व ही कार्यभार ग्रहण किया था।
कोमल की यह उपलब्धि निरंतर सुधार और अटूट संकल्पशक्ति की परिचायक है। इससे पूर्व उन्होंने वर्ष 2023 में बिना किसी कोचिंग की सहायता के केवल स्वाध्याय (सेल्फ स्टडी) के बल पर पहली बार आरएएस परीक्षा दी थी। अक्टूबर 2025 में घोषित हुए उस परीक्षा परिणाम में उन्हें एसटी वर्ग में 64वीं रैंक प्राप्त हुई थी, किंतु इस सफलता से संतुष्ट होने के बजाय उन्होंने अपने लक्ष्य को और अधिक परिष्कृत करने का निर्णय लिया। वर्ष 2024 में पुनः परीक्षा में सम्मिलित होकर उन्होंने अपनी मेहनत और सटीक रणनीति के माध्यम से एसटी वर्ग में 22वीं रैंक तथा ओवरऑल 1004वीं रैंक अर्जित कर ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के पश्चात अब उनके तहसीलदार पद पर नियुक्त होने की प्रबल संभावना है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर दृष्टि डालें तो कोमल का करियर अत्यंत मेधावी रहा है। उन्होंने वर्ष 2016 में 10वीं कक्षा 93 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की, जबकि 12वीं कक्षा में गणित-विज्ञान विषय के साथ 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी का रुख किया, जहां से वर्ष 2021 में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की। प्रशासनिक सेवा में जाने का दृढ़ निश्चय कर वह जयपुर आ गईं और एक किराए के कमरे को ही अपनी तपस्थली बनाकर तैयारी में जुट गईं।
अपनी सफलता के मूल मंत्र साझा करते हुए कोमल बताती हैं कि केवल परिश्रम ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही दिशा में किया गया प्रयास अनिवार्य है। उन्होंने डिजिटल युग के भटकाव से बचने के लिए सोशल मीडिया से पूर्णतः दूरी बनाए रखी और मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक अध्ययन सामग्री डाउनलोड करने तक ही सीमित रखा। प्रतिदिन 5 से 7 घंटे की एकाग्र पढ़ाई, विषयों को रटने के स्थान पर उनकी अवधारणात्मक समझ विकसित करना और नियमित अभ्यास ही उनकी इस गौरवशाली यात्रा का आधार बना। उनकी यह सफलता सिद्ध करती है कि यदि रणनीति स्पष्ट हो और संकल्प अडिग, तो सीमित संसाधनों के बीच भी सफलता के उच्चतम शिखर को छुआ जा सकता है।

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