जैविक खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर: 'खेत बचाओ अभियान' में जुटी सवाई माधोपुर के अन्नदाताओं की भीड़
क्या रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बच पाएगी सवाई माधोपुर की मिट्टी? 'खेत बचाओ अभियान' के तहत आयोजित किसान सम्मेलन में विशेषज्ञों और किसानों के बीच हुई महाचर्चा, जानें कैसे जैविक खेती से बदल रही है अन्नदाताओं की तकदीर और भविष्य की कृषि।

सवाई माधोपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर और उपस्थित किसान।
सवाई माधोपुर, 12 जून। सवाई माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में आयोजित 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक विशेष किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया, जो क्षेत्र में टिकाऊ कृषि के भविष्य की नई इबारत लिखता प्रतीत हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से लगभग 250 किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी सुनिश्चित की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अन्नदाताओं को रासायनिक खेती के मोहजाल से बाहर निकाल कर जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था, ताकि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण और उत्पादन लागत में कमी सुनिश्चित की जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती न केवल किसानों की आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि यह स्वस्थ समाज और सशक्त भारत के निर्माण का भी आधार है। उन्होंने उपस्थित कृषक समुदाय का आह्वान किया कि वे रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम करें और पर्यावरण के अनुकूल दीर्घकालिक कृषि तकनीकों को अपनाएं। खंडार प्रधान नरेंद्र चौधरी ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आधुनिक युग में वैज्ञानिक तकनीकों के साथ पारंपरिक प्राकृतिक खेती का तालमेल ही कृषि को मुनाफे का सौदा बना सकता है।
सम्मेलन के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने रासायनिक उर्वरकों के निरंतर बढ़ते उपयोग से मिट्टी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संचयन और प्राकृतिक खेती के आर्थिक व पर्यावरणीय लाभों पर विस्तृत चर्चा की। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि जैविक खेती न केवल भूमि की उर्वरता को पुनर्जीवित करती है, बल्कि यह कृषि उत्पादन की लागत को कम कर किसानों को एक दीर्घकालीन आत्मनिर्भरता प्रदान करती है।
इस किसान महाकुंभ में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को धरातल पर उतारने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं उद्यान विभाग की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों ने अपनी समस्याओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा, जिस पर चर्चा कर उनके समुचित समाधान प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट हुआ कि सवाई माधोपुर का किसान अब अपनी जमीन को बचाने और खेती को उन्नत बनाने के लिए नई राह चुनने को तैयार है।

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