खानिया, जयपुर। 13 मार्च को खानिया जी के अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 34 साधुओं सहित उपसर्ग निवारण स्थल में भव्य मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। राणा जी नसिया के पदाधिकारी आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती में सम्मिलित हुए।

सर्वप्रथम मान स्तंभ और मंदिर के मूलनायक श्री वासुपूज्य भगवान के दर्शन कर अभिषेक का अवसर प्राप्त हुआ। इसके बाद मंदिर में अन्य वेदियों पर विराजित श्रीजी के दर्शन किए गए। आचार्य श्री ने संघ के साधुओं और समाज को बताया कि सन 1969 में दीक्षा के चार माह पश्चात उन्हें नेत्र ज्योति जाने का उपसर्ग हुआ था, जिसे इसी जिनालय के 1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान के समक्ष शांति भक्ति पाठ करने पर नेत्र ज्योति वापस प्राप्त हुई। इस अवसर पर उपस्थित सभी साधु समाज जन ने चंद्रप्रभ भगवान और आचार्य श्री की जयकार की।

संघ चेत्यालय में अभिषेक के पश्चात धर्म सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य श्री ने बताया कि 24 तीर्थंकरों में पांच बाल ब्रह्मचारी भगवान हुए, जिनमें मंदिर के मूल नायक श्री वासुपूज्य भगवान प्रथम बाल ब्रह्मचारी हैं। जयपुर में सैकड़ों मंदिर स्थापित हैं, किंतु खनिया जी के इस मंदिर में अनेक अतिशय घटित हुए हैं। आचार्य श्री ने कहा कि पूर्वाचार्यों ने भी यहां दर्शन और चातुर्मास किया है। प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज ने तीन चातुर्मास खनिया जी में किए और आचार्य पद भी यही प्राप्त हुआ। द्वितीय पट्टाचार्य श्री शिवसागर जी को भी आचार्य पद खनिया जी में प्राप्त हुआ।

आचार्य श्री ने आगे बताया कि अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली भी यही रही है। आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज ने मूलनायक श्री वासुपूज्य भगवान के समक्ष आचार्य पद का त्याग इसी खनियाजी में किया। मंदिर में भगवान की प्रतिमा तीन बार चोरी हुई, लेकिन पुनः वापस प्राप्त हुई। इसी जिनालय में श्री पदमप्रभ भगवान के समक्ष नेत्र ज्योति जाने के पश्चात शांति भक्ति का पाठ करने पर नेत्र ज्योति वापस प्राप्त हुई।

खनिया जी में देश के प्रख्यात विद्वानों की तत्वचर्चा भी हुई, जिसमें सोनगढ़ विचारधारा के विद्वानों से धार्मिक तत्वों पर चर्चा हुई। आचार्य शिवसागर जी ने अपने तार्किक विचार प्रस्तुत किए, जिन्हें सभी ने स्वीकार किया। इस तत्वचर्चा ने “खनिया तत्व चर्चा” के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त की। इस अवसर पर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी का उपदेश हुआ और मंच संचालन श्री कमलबाबू ने किया। आचार्य संघ कुछ दिनों तक खनिया जी में अल्प प्रवास करेंगे।

राजेश पंचोलिया, इंदौर

Ruturaj Ravan

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