खण्डीप में किसान महापंचायत: पांचना बांध से पानी की मांग पर आंदोलन तेज
पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर खण्डीप में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना छठे दिन भी जारी रहा।

राजस्थान के खण्डीप में पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के छठे दिन महापंचायत में जुटे हजारों किसान और ग्रामीण।
खण्डीप में चल रही अनिश्चितकालीन किसान महापंचायत और धरना आंदोलन के छठे दिन भी हजारों किसानों की भारी भीड़ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए आंदोलन को और अधिक व्यापक व मजबूत बना दिया। किसान कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि पांचना बांध से नहरों में जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए तथा माननीय न्यायालय के आदेशों की तत्काल पालना की जाए।
धरना स्थल पर छठे दिन भी किसानों, पंच-पटेलों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों की हजारों की संख्या में भागीदारी देखी गई। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने मंच पर पहुंचकर आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। अट्ठाईसा क्षेत्र के पंच-पटेल, जगरवाल एवं मिच्या समाज के प्रतिनिधियों ने भी एकजुटता दिखाते हुए किसानों की मांगों के समर्थन में अपनी सहमति व्यक्त की।
धरने के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों ने माहौल को जीवंत बनाए रखा। पीलौदा गांव से बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे धरना स्थल पर पहुंचे और लोकगीतों व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आंदोलन को समर्थन दिया। ग्रामवार जिम्मेदारियों के तहत धरना स्थल की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 11 जून को ग्राम मोहचा, मोहचा का पुरा, सुन्दरपुर एवं बाढ़ रायल के ग्रामीणों ने व्यवस्थाओं का दायित्व संभाला।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सागरबाई मेड़िया (हिण्डौन), साबूती मेड़िया (रतनापुरा), गौरन्ती मेड़िया (रतनापुरा) एवं रेखा मीना मेड़िया (मादनगांव) द्वारा प्रस्तुत लोकगीतों ने उपस्थित जनसमूह को उत्साहित किया और धरना स्थल पर जनसमर्थन को और मजबूती प्रदान की।
विधायक मीना ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों की जायज मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक एवं तीव्र रूप लेगा।
किसानों ने दोहराया कि वे शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब तक कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। लगातार बढ़ते समर्थन और जनभागीदारी के बीच यह आंदोलन अब क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़े जनसंघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

Pratahkal Bureau
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