पांचना नहरों में पानी की मांग पर सातवें दिन भी धरना जारी, आंदोलन विस्तार की चेतावनी
ग्राम खण्डीप में पांचना बांध के कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी खोलने की मांग को लेकर आयोजित किसान महापंचायत के धरने में हजारों किसानों, पंच-पटेलों और क्षेत्रीय जनप्रतिधियों ने हिस्सा लेकर हुंकार भरी।

ग्राम खण्डीप में लगे एक विशाल टेंट रूपी धरना स्थल के भीतर जमीन पर पारंपरिक पोशाक पहने बैठे कमांड क्षेत्र के बुजुर्ग व युवा किसान तथा पृष्ठभूमि में "किसान महापंचायत" का लगा बड़ा बैनर।
ग्राम खण्डीप में पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन किसान महापंचायत का धरना सातवें दिन भी पूरे जोश और मजबूती के साथ जारी रहा। धरना स्थल पर कमांड क्षेत्र के हजारों किसान, पंच-पटेल, युवा, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने हक के पानी की मांग को लगातार बुलंद कर रहे हैं। लगातार बढ़ते जनसमर्थन के चलते इस आंदोलन ने अब व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले लिया है, जिससे प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
धरने के दौरान दिनभर किसानों की आवाजें गूंजती रहीं और पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। किसानों का आरोप है कि माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सरकार द्वारा नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाना उनके साथ अन्याय है और न्यायालय की भावना के विपरीत है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक तथा निर्णायक रूप दिया जाएगा।
धरना स्थल की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ग्रामीणों द्वारा जिम्मेदारी का क्रमबद्ध निर्वहन किया जा रहा है। 11 जून को ग्राम खरेड़ा और पावटा के ग्रामीणों ने व्यवस्थाएं संभाली, जबकि 12 से 13 जून तक ग्राम रौंसी, लोटवाड़ा, रोणाली और कारवाड़ के ग्रामीण धरना स्थल की व्यवस्थाओं का दायित्व निभा रहे हैं। इस सामूहिक भागीदारी ने आंदोलन को अनुशासन और एकता का उदाहरण बना दिया है।
धरना स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी लगातार जारी रहा, जिसमें लोक कलाकारों और गीतकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से किसानों में नया उत्साह भरा। महिला कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोकगीत “चाहे हम मिट जावां, मर जावां, पांचना से नहर लावेंगे” ने उपस्थित भीड़ में विशेष जोश पैदा किया। बड़ी संख्या में महिलाएं भी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
धरना सभा को संबोधित करते हुए विधायक रामकेश मीना ने कहा कि कमांड क्षेत्र का किसान अपने अस्तित्व और भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है और उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना से बच रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन को गांव-गांव तक विस्तार दिया जाएगा।
इस बीच 12 जून को टोंक-सवाई माधोपुर सांसद हरिश्चंद्र मीना के धरना स्थल पर पहुंचने का कार्यक्रम तय बताया गया है, जिससे आंदोलन को और अधिक राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। किसानों ने एक स्वर में संकल्प दोहराया कि जब तक पांचना बांध से नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
यह आंदोलन अब केवल पानी की मांग तक सीमित न रहकर किसानों के अधिकार, सम्मान और भविष्य की निर्णायक लड़ाई का रूप लेता जा रहा है, जो क्षेत्र में सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गहरा प्रभाव छोड़ रहा है।

Pratahkal Bureau
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