सवाई माधोपुर/खण्डार। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के जाल को काटने के लिए राजस्थान पुलिस अब एक्शन मोड में है। सवाई माधोपुर जिले की खण्डार थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए देशव्यापी साइबर ठगी गिरोह को 'म्यूल अकाउंट' (किराये का खाता) उपलब्ध कराने वाले एक मुख्य आरोपी को दबोच लिया है। पुलिस की इस कार्रवाई ने उस संगठित तंत्र की कमर तोड़ दी है जो भोले-भाले लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल निर्दोष लोगों की मेहनत की कमाई डकारने के लिए करते थे। पकड़ा गया आरोपी भरतलाल गुर्जर महज चंद रुपयों के लालच में एक ऐसे गिरोह का मोहरा बन गया, जिसने देशभर के लोगों के साथ लाखों रुपये की डिजिटल लूट को अंजाम दिया।

पुलिस मुख्यालय जयपुर के निर्देशानुसार राज्य स्तर पर साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार बेनीवाल के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई। पुलिस को जांच के दौरान एक संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी मिली थी, जिसमें अल्प समय में करीब 11,92,863 रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया। जब इस खाते की गहराई से पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस खाते के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों से साइबर पोर्टल 1930 पर कुल छह गंभीर शिकायतें दर्ज थीं। इन शिकायतों में टेलीग्राम इन्वेस्टमेंट स्कीम, जॉब फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडे अपनाकर लोगों से ठगी करने के मामले शामिल थे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विजय सिंह मीना और वृत्ताधिकारी श्री हंसराज बैरवा के सुपरविजन में थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की पहचान सांवटा निवासी भरतलाल गुर्जर पुत्र नवल गुर्जर के रूप में की। पुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में 27 वर्षीय भरतलाल ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उसने नवंबर 2024 में अपने एक करीबी दोस्त के बहकावे में आकर मात्र 30 हजार रुपये के कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता गिरोह को सौंप दिया था। इस खाते का उपयोग ठगों द्वारा टेलीग्राम के जरिए निवेश का झांसा देने, जीएसटी चार्ज और विड्रॉल चार्ज के नाम पर लोगों को डराने और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे डमी मैसेज भेजकर मोटी रकम वसूलने के लिए किया जा रहा था।

इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में खण्डार थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह (पुलिस निरीक्षक), एएसआई नन्दराम, कांस्टेबल विजयपाल (1059), कांस्टेबल मुलाराम (1462) और कांस्टेबल जितेन्द्र (233) शामिल रहे। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और भरतलाल के उस दोस्त की तलाश में जुटी है जिसने उसे इस दलदल में धकेला था। यह गिरफ्तारी उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो मामूली कमीशन के चक्कर में अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को किराए पर देते हैं। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि साइबर अपराध की कड़ियां कितनी भी उलझी क्यों न हों, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच कर ही रहेंगे।

Pratahkal Bureau

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