सिविल न्यायाधीश अंकिता सिंघल ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की चेतावनी देकर पाबंद किया और पुलिस के सहयोग से नाबालिगों का भविष्य सुरक्षित किया।

खंडार। क्षेत्र में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा की रोकथाम हेतु न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्णायक कार्रवाई की है। अंकिता सिंघल, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट खंडार तथा अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति खंडार ने अपनी सक्रियता और सराहनीय पहल से चार प्रस्तावित बाल विवाहों को समय रहते रुकवाकर नाबालिग बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है।

प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने संबंधित परिवारों को तत्काल तलब किया। सुनवाई के दौरान अंकिता सिंघल ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के कड़े प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। न्यायालय ने परिवार जनों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि वे अपने नाबालिग बच्चों का विवाह निर्धारित विधिक आयु पूर्ण होने से पूर्व कदापि न करें। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि बाल विवाह करना और करवाना कानूनन गंभीर एवं दंडनीय अपराध है, जिसके लिए कानून में कठोर दंड के प्रावधान सुनिश्चित हैं। न्यायालय की इस कड़ाई के बाद परिजनों को कानून की पालना हेतु पाबंद किया गया।

इस सफल कार्रवाई में स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग का समन्वित सहयोग रहा, जिसके फलस्वरूप चार नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा संभव हो सकी। न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकिता सिंघल ने आमजन से इस कुप्रथा को जड़ से मिटाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्तावित बाल विवाह की सूचना तत्काल प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, तालुका विधिक सेवा समिति या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें। इसके अतिरिक्त बाल विवाह रोकथाम हेतु गठित कंट्रोल रूम नंबर 07462-220602 और 220201 पर भी सूचना दी जा सकती है ताकि समय रहते विधि सम्मत आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जा सके।

Updated On 21 April 2026 3:40 PM IST
Pratahkal Newsroom

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