देश में महंगाई विकराल, चीनी 60 रुपये और खाद्य तेल 220 रुपये किलो तक पहुंचा
चीनी 60 रुपये, खाद्य तेल 220 रुपये और देसी घी 600 रुपये तक पहुंचा, दाल, सब्जियों व मसालों की महंगाई से गरीब-मध्यम वर्ग का बजट बिगड़ा।

तस्वीर में दिख रहे बोरे में रखे विभिन्न प्रकार के अनाज और दालें दुकान में बिक्री के लिए प्रदर्शित हैं।
गंगापुर सिटी। दैनिक उपयोग की खाद्य वस्तुओं में लगातार बढ़ती महंगाई से गरीब और मध्यम परिवारों का घरेलू बजट बिगड़ने लगा है। दाल, चावल, चीनी, खाद्य तेल, घी, मसाले और सब्जियों के दामों में वृद्धि के चलते आम उपभोक्ता परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि घरेलू उत्पादनों में बढ़ती महंगाई पर केंद्र सरकार का कोई अंकुश नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धातु, केमिकल और क्रूड ऑयल आदि में बेहताशा वृद्धि और महंगाई के चलते घरेलू उपभोक्ताओं का बजट पहले ही प्रभावित है। इनसे जुड़ी वस्तुएं, जिनमें सिल्वर, गोल्ड आदि शामिल हैं, भी आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर हो गई हैं। केमिकल में भयंकर तेजी के कारण डिटर्जेंट पाउडर, साबुन, सर्फ, प्लास्टिक एवं अन्य केमिकल वस्तुओं के दाम भी चरम पर पहुंच गए हैं।
घरेलू खाद्य उत्पादनों पर नजर डालें तो चीनी 42 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। खाद्य तेल 160 रुपये से बढ़कर 220 रुपये तक पहुंच गया है। हल्दी, मिर्च और धनिया सहित मसालों में भी 40 प्रतिशत तेजी आई है। खाद्यान्नों में गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्का और मोटे अनाजों के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई है। देसी घी 400 रुपये से बढ़कर 600 रुपये तक पहुंच चुका है।
गोला, बादाम, किशमिश, काजू आदि मेवा भी गरीब उपभोक्ताओं से दूर हो चुका है। दाल और चावल के साथ हरी सब्जियों में भी 20 से 40 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ चुकी है। दैनिक उपयोग की इन वस्तुओं के बढ़ते दामों ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के सामने घरेलू खर्च का संतुलन बनाए रखना मुश्किल कर दिया है।
भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ घरेलू उपयोग में आने वाली खाद्य वस्तुओं का उत्पादनकर्ता भी है और देश के घरेलू उत्पादनों में कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद देश के उद्योगपति और सटोरिया स्टॉकिस्ट उत्पादन में कमी दर्शाकर आम जनता पर महंगाई का भार थोपकर अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय महंगाई का फायदा देश के बड़े-बड़े उद्योगपति और सटोरिये स्टॉकिस्ट घरेलू उत्पादनों में तेजी लाकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। इस पर केंद्र सरकार का कोई अंकुश नहीं होने से महंगाई को लेकर उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ रही है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार भी इन बड़े-बड़े उद्योगपतियों और सटोरियों के साथ मिली हुई है।
यदि सरकार ने शीघ्र ही बढ़ती हुई महंगाई पर अंकुश नहीं लगाया तो आने वाले दिनों में देश के गरीब उपभोक्ताओं पर और अधिक मार पड़ सकती है। महंगाई विकराल रूप ले चुकी है। उपभोक्ता और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार को बढ़ती महंगाई पर शीघ्र अंकुश लगाना चाहिए। देश की 70 प्रतिशत गरीब जनता महंगाई की जद में है।

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