करौली में विश्व सिज़ोफ्रेनिया दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम
नवीन चिकित्सालय भवन में संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अंधविश्वास को दूर कर समय पर उपचार और पारिवारिक सहयोग अपनाने की अपील की।

करौली के नवीन चिकित्सालय भवन में विश्व सिज़ोफ्रेनिया दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेमराज मीना (मेज के पीछे खड़े हुए) और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञ।
मानसिक रोगों को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और अंधविश्वास के बीच विश्व सिज़ोफ्रेनिया दिवस पर करौली में डॉक्टरों ने लोगों से जागरूक होने और समय पर इलाज अपनाने की अपील की। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई एवं मनोरोग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नवीन चिकित्सालय भवन में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा कि सिज़ोफ्रेनिया कोई ऊपरी साया या दैवीय प्रकोप नहीं, बल्कि एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य मानसिक बीमारी है।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “सिज़ोफ्रेनिया एक सामूहिक जिम्मेदारी, समावेशन आवश्यक” रखी गई। कार्यक्रम के दौरान मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेमराज मीना ने कहा कि सिज़ोफ्रेनिया एक जटिल मानसिक विकार है, जो व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भावनाओं को गहराई से प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में मरीज को मतिभ्रम, अकारण डर, अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देना, काल्पनिक आकृतियां दिखाई देना और अत्यधिक शक करने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके कारण मरीज धीरे-धीरे सामाजिक दूरी बनाने लगता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में लंबे समय तक असामान्य बदलाव, अकेलापन या विचित्र बातें दिखाई दें तो बिना देरी किए मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रवि कुमार मीना ने कहा कि जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के चलते अधिकांश मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, नियमित दवाओं और मजबूत पारिवारिक सहयोग से इस बीमारी को नियंत्रित कर मरीज को सामान्य जीवन की मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।
वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह सामान्य हैं। उन्होंने लोगों से बिना संकोच अपनी समस्याएं डॉक्टरों से साझा करने की अपील की तथा परिजनों से मरीजों को सकारात्मक वातावरण और सहयोग देने का आग्रह किया।
साइकेट्रिक नर्स गौरव गोयल ने समाज में फैली भ्रांतियों का खंडन करते हुए कहा कि मानसिक रोग को दैवीय प्रकोप या ऊपरी साया मानना गलत है। उन्होंने कहा कि समय पर लक्षणों की पहचान, उचित काउंसलिंग, टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 पर त्वरित परामर्श और चिकित्सकीय देखरेख से सिज़ोफ्रेनिया का प्रभावी इलाज संभव है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनसमुदाय से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील और जागरूक रवैया अपनाने का आह्वान किया गया। जागरूकता सत्र में दीनदयाल लोधा, मीना कुमारी, देशराज राजपूत सहित अनेक मरीजों, उनके अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम ने मानसिक रोगों को लेकर समाज में व्याप्त डर, भ्रम और अंधविश्वास को तोड़ते हुए समय पर उपचार और सहयोग की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा।

Pratahkal Bureau
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