करौली जिले में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित और प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के व्यापक निस्तारण के साथ न्यायिक प्रक्रिया को गति मिली। माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश करौली श्री अरूण कुमार बैरीवाल के निर्देशन में 09 मई 2026 को जिले के समस्त न्यायिक न्यायालयों, समस्त राजस्व न्यायालयों, जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग करौली एवं श्रम विभाग करौली में एक दिवसीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश करौली श्री अरूण कुमार बैरीवाल, सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्रीमती ममता चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करौली श्रीमती परवीन बानू तथा अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री देवेन्द्र कुमार द्वारा मां सरस्वती के चित्रपट पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के लिए करौली मुख्यालय पर 03, सपोटरा मुख्यालय पर 01, ताल्लुका मुख्यालय हिण्डौन सिटी पर 02, श्रीमहावीरजी पर 01 तथा टोडाभीम पर 01 लोक अदालत बैंचों का गठन किया गया। इस प्रकार जिलेभर में कुल 08 बैंचों द्वारा राजीनामा के आधार पर प्रकरणों का निस्तारण किया गया।

करौली मुख्यालय पर बैंच संख्या 01 की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करौली श्रीमती परवीन बानू ने की। बैंच संख्या 02 के अध्यक्ष अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करौली श्री देवेन्द्र कुमार रहे, जबकि बैंच संख्या 03 की अध्यक्षता सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण करौली श्रीमती ममता चौधरी ने की। बैंच संख्या 01 में सदस्य के रूप में अधिवक्ता श्री वीरेन्द्र सिंह धावाई तथा जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग करौली के सदस्य श्री सुरेन्द्र चतुर्वेदी शामिल रहे। बैंच संख्या 02 में सदस्य के रूप में अधिवक्ता श्री अब्दुल वाहिद खांन रहे, जबकि बैंच संख्या 03 में तहसीलदार तहसील करौली श्री बलवीर सिंह राणा सदस्य के रूप में उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय लोक अदालत में सम्पूर्ण करौली जिले के न्यायालयों में लंबित 3704 प्रकरण प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 2150 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए 1,01,68,699 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। वहीं बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं से संबंधित प्री-लिटिगेशन के 25,237 प्रकरण रखे गए, जिनमें से 14,336 प्रकरणों का निस्तारण कर 1,54,68,536 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।

इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 28,941 प्रकरण प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 16,486 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए कुल 2,56,37,235 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिवक्ताओं और पक्षकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा आपसी राजीनामे के आधार पर प्रकरणों का निस्तारण कराया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों के त्वरित निस्तारण ने न्यायिक प्रक्रिया को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Pratahkal Bureau

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