करौली, 23 अप्रैल। वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच बढ़ते संघर्ष की जटिलताओं को सुलझाने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के संकल्प के साथ करौली में एक महत्वपूर्ण विधिक अध्याय का समापन हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी 'नालसा मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच योजना 2025' के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA), जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का द्वितीय चरण गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, करौली के सभागार में संपन्न हुआ।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश अरूण कुमार बेरीवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के विधिक और प्रशासनिक पहलुओं पर गहरा प्रकाश डाला। न्यायाधीश बेरीवाल ने उपस्थित प्रतिभागियों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की बारीकियों से अवगत कराते हुए रालसा द्वारा जारी विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। कार्यशाला के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की वैचारिक समझ विकसित करने के साथ-साथ इस योजना को नियंत्रित करने वाली कानूनी और प्रशासनिक संरचना पर गहन मंथन किया गया।

इस प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र क्षेत्रीय स्तर पर हस्तक्षेप करने वाले पैरा लीगल वॉलंटियर्स और पैनल अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका रहा। उन्हें मुआवजा तंत्र, दावा सुविधा की प्रक्रिया, कानूनी सहायता के प्रावधान और शिकायत निवारण तंत्र के बारे में विधिवत प्रशिक्षित किया गया ताकि अंतिम छोर पर खड़े पीड़ित व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

इस गरिमामयी अवसर पर न्यायिक और प्रशासनिक जगत की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में हिण्डौन से अति. जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम संख्या 01 अंबीका सोनी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ीं। वहीं, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करौली परवीन बानू, प्रशिक्षु न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक भारद्वाज, करीना काला, आयुषी गोयल, अक्ष्य अवस्थी सहित करौली उपखण्ड अधिकारी प्रेमराज मीना, सपोटरा उपखण्ड अधिकारी पंकज बडगुजर और मण्डरायल उपखण्ड अधिकारी अनिल जैन ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इसके अतिरिक्त सहायक वन संरक्षक एस.बी. मीना, जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रवण कुमार और प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला न केवल विधिक साक्षरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण और मानवीय अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

Updated On
Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story