सवाई माधोपुर में कैलाश खेर की सूफियाना लहर: 263वें स्थापना दिवस पर 'रणथम्भौर रागा' ने रचा इतिहास
सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस पर आयोजित ‘रणथम्भौर रागा म्यूजिकल नाइट’ में पद्मश्री कैलाश खेर की जादुई आवाज का जादू चला। दशहरा मैदान में उमड़े 15 हजार से अधिक दर्शकों ने सूफियाना और भक्ति गीतों पर देर रात तक जश्न मनाया। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की मौजूदगी और भव्य आतिशबाजी के साथ संपन्न हुए इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

सवाई माधोपुर। रणथम्भौर की ऐतिहासिक वादियों और भक्ति के अनूठे संगम ने सोमवार रात एक नया इतिहास रच दिया। सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘रणथम्भौर रागा म्यूजिकल नाइट’ में उस समय जनसैलाब उमड़ पड़ा, जब पद्मश्री कैलाश खेर ने अपनी जादुई आवाज से फिजाओं में सूफियाना रंग घोल दिया। दशहरा मैदान में आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में करीब 15 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी ने उत्साह के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक और युवाओं से लेकर महिलाओं तक, हर कोई सुरों के इस महासागर में गोते लगाता नजर आया।
कार्यक्रम का आगाज सवाई माधोपुर की गौरवशाली विरासत, प्राकृतिक वैभव और रणथम्भौर की वैश्विक पहचान पर केंद्रित एक भावुक वीडियो प्रेजेंटेशन के साथ हुआ। जैसे ही मंच पर कैलाश खेर का पदार्पण हुआ, पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा। "मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया" और "जाना जोगी दे नाल वे" जैसे कालजयी गीतों से शुरू हुआ यह सफर "बगड़ बम बम" तक पहुंचते-पहुंचते आध्यात्मिक पराकाष्ठा पर जा लगा। डमरू की थाप पर जब खेर ने शिव स्तुति शुरू की, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरी धरा शिवभक्ति में लीन हो गई हो। "तेरी दीवानी", "अल्लाह के बंदे", "यूं ही चला चल राही" और "जय जयकारा" जैसे गीतों पर दर्शक अपनी सुध-बुध खोकर झूमने लगे। गायक ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि प्रशंसकों को अपना 'परिवार' बताते हुए उन्हें मंच पर आकर साथ थिरकने के लिए भी आमंत्रित किया।
इस सांस्कृतिक महाकुंभ में औपचारिक गरिमा का समावेश तब हुआ जब राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मंच पर पहुंचकर कैलाश खेर का सम्मान किया। डॉ. मीणा ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं के लिए प्रेरणापुंज बनते हैं और जिले की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर सुदृढ़ करते हैं। कार्यक्रम के दौरान जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि सपरिवार मौजूद रहे। प्रशासनिक अमला भी संगीत की इस अविरल धारा से अछूता नहीं रहा और पूरी रात कलाकारों का उत्साहवर्धन करता रहा। कैलाश खेर ने सवाई माधोपुर की आध्यात्मिक चेतना की सराहना करते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा आयोजित 'अमरूद महोत्सव' को एक अनुकरणीय और अनूठी पहल करार दिया। कार्यक्रम का समापन आकाश को सतरंगी रोशनी से सराबोर करने वाली भव्य आतिशबाजी के साथ हुआ, जिसने इस स्थापना दिवस को सवाई माधोपुर के इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर कर दिया।

Pratahkal Bureau
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