जन धन बैंक मित्र मानदेय और शोषण के विरुद्ध 'दिल्ली चलो' आंदोलन की चेतावनी
ऑल इंडिया बैंक मित्र एकता संघ ने 12 साल से लंबित वेतन वृद्धि और निजी कंपनियों द्वारा की जा रही कमीशन कटौती के खिलाफ 30 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना को धरातल पर उतारने वाले देश के 15 लाख बैंक मित्र और कियोस्क संचालक आज निजी वित्तीय कंपनियों के निर्मम शोषण और सरकारी बेरुखी के चलते भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। वर्ष 2014 में निर्धारित ₹5500 के अव्यावहारिक मानदेय पर आज भी काम करने को मजबूर इन बैंक मित्रों की स्थिति बंधुआ मजदूरों से भी बदतर हो गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के विश्लेषण से स्पष्ट है कि 2014 के ₹5500 की क्रय शक्ति आज घटकर मात्र ₹1800 रह गई है, जबकि इसी अवधि में दुकान किराया, बिजली, इंटरनेट और स्टेशनरी के खर्चों में 300% से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्तमान में एक बैंक मित्र को ₹5000 दुकान किराया, ₹1000 इंटरनेट, ₹1500 बिजली और अन्य स्टाफ खर्च स्वयं वहन करने पड़ते हैं, जिससे उनके सामने परिवार पालने की गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई है।
शोषण का यह खेल वर्ष 2014 के आसपास तब शुरू हुआ जब बैंकों ने सीधी नियुक्ति के बजाय निजी कंपनियों को ठेका देना शुरू किया। बैंकों द्वारा ₹5500 मानदेय और भत्ते पूर्ण रूप से दिए जाने के बावजूद बिचौलिया कंपनियां 50% से अधिक कमीशन काट लेती हैं, जिससे संचालक के हाथ में मात्र ₹2500 से ₹3000 ही आते हैं। यह आय मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी से भी कम है, जबकि एक बैंक मित्र बैंक कर्मचारी की तुलना में चार गुना अधिक कार्यभार संभालता है, जिसमें खाता खोलना, डीबीटी भुगतान, आधार लिंकिंग, बीमा, पेंशन और ऋण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। नाबार्ड की रिपोर्ट में भी यह तथ्य संज्ञान में आया है कि कंपनियां बैंकों से प्राप्त पूरी राशि संचालकों तक नहीं पहुंचने दे रही हैं।
ऑल इंडिया बैंक मित्र एकता संघ के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को प्रेषित शिकायती पत्र में चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो देशव्यापी "दिल्ली चलो" आंदोलन छेड़ा जाएगा। संघ की प्रमुख मांगों में निजी कंपनियों की ठेका प्रथा को तत्काल समाप्त कर बैंक मित्रों को सीधे बैंकों से अनुबंधित करना, न्यूनतम वेतन ₹18,000 और भत्तों सहित कुल ₹25,500 प्रति माह सुनिश्चित करना, और मानदेय का भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, संघ ने पिछले पांच वर्षों के कमीशन का फोरेंसिक ऑडिट कराने, दोषियों को ब्लैकलिस्ट करने, प्रति लेनदेन कमीशन को तीन गुना बढ़ाने और वर्ष 2014 से अब तक का बकाया एरियर ब्याज सहित भुगतान करने की मांग की है। कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर घर-घर बैंकिंग पहुंचाने वाले इन वॉरियर्स ने स्पष्ट किया है कि अब वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

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