जैसलमेर। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर कथित प्रशासनिक हमले के विरोध में शुक्रवार को जैसलमेर में प्रदेशभर के पत्रकारों का अभूतपूर्व आक्रोश देखने को मिला। जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह नाथावत के खिलाफ सैकड़ों पत्रकार सड़कों पर उतर आए और जोरदार नारेबाजी करते हुए उनके तत्काल निलंबन की मांग की। देश के सबसे पुराने पत्रकार संगठन IFWJ के आह्वान पर आयोजित इस प्रदेश स्तरीय विरोध प्रदर्शन में राजस्थान के विभिन्न जिलों से पत्रकार जैसलमेर पहुंचे। हनुमान सर्किल स्थित गांधी दर्शन से शुरू हुई विशाल रैली पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर के खिलाफ कड़ा रोष जताया।

रोजगार पर हमला और कलम दबाने की साजिश

धरना स्थल पर संबोधित करते हुए IFWJ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया कि कलेक्टर द्वारा उनके "स्वाद रेस्टोरेंट" पर की गई कार्रवाई पूरी तरह द्वेषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि "पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए उनके रोजगार को निशाना बनाया जा रहा है और झूठे मुकदमों के जरिए डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है, जिसे संगठन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।"





कोर्ट में भी लड़ाई और सड़क पर भी संघर्ष

प्रदेश महासचिव मनवीर सिंह चुंडावत ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि पत्रकार डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि "इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा, लेकिन साथ ही सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो जयपुर में मुख्यमंत्री का घेराव भी किया जाएगा।"

22 साल में नहीं दिखी गड़बड़ी, तो अब कार्रवाई क्यों?

प्रदेश सचिव एवं जोधपुर संभाग प्रभारी विक्रमसिंह करणोत ने प्रशासनिक कार्रवाई की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि "स्वाद रेस्टोरेंट वर्ष 2004 से संचालित हो रहा था और पिछले 22 वर्षों में किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को इसमें कोई खामी नजर नहीं आई। यदि लीज शर्तों का उल्लंघन था, तो नोटिस या जुर्माना लगाया जा सकता था, लेकिन सीधे सीज करने और फिर भवन तोड़ने की कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।"

बर्खास्तगी की मांग और हनुमान चालीसा का पाठ

धरना प्रदर्शन के दौरान विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कलेक्टर की बर्खास्तगी की मांग की। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी पत्रकारिता की स्वतंत्रता का है। धरना समाप्ति के बाद सैकड़ों पत्रकारों ने तख्तियां लेकर रैली निकाली और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। वहां हनुमान चालीसा का पाठ कर विरोध जताया गया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

जैसलमेर का यह विरोध प्रदर्शन अब प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है, यदि राज्य सरकार ने जैसलमेर कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत को तुरंत प्रभाव से निलंबित नहीं किया तो ये आंदोलन प्रदेश भर में होना तय है। इस अवसर पर जैसलमेर सहित राजस्थान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों की संख्या में पत्रकारों ने अपना प्रतिनिधित्व दर्शाया। क्या प्रशासनिक कार्रवाई की आड़ में पत्रकारों को टारगेट किया जा रहा है? 22 वर्षों तक वैध मानी गई लीज पर अचानक सख्ती क्यों? क्या यह मामला लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है? ये कुछ ऐसे बड़े सवाल हैं जो इस आंदोलन के केंद्र में बने हुए हैं।

Pratahkal Bureau

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