जयपुर: शिक्षा मंत्री के गढ़ में गूंजेगी शिक्षकों की हुंकार, तबादलों और वादाखिलाफी के खिलाफ 'सियाराम' का बड़ा शंखनाद
जयपुर में आयोजित शिक्षक संघ (सियाराम) की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। बोर्ड परीक्षाओं के बीच बिना आवेदन हुए हजारों शिक्षकों के तबादलों और लंबित मांगों पर सरकार की उदासीनता के खिलाफ 1 फरवरी को शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में विशाल शिक्षक रैली आयोजित की जाएगी। स्थानांतरण नीति और वेतन विसंगतियों को लेकर शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

जयपुर। राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में उस समय भारी उबाल आ गया जब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं के बीच हुए हजारों तबादलों ने शिक्षक समुदाय को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने प्रदेश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और विभाग की 'उदासीनता' के खिलाफ एक निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। यह संघर्ष अब राजधानी के गलियारों से निकलकर सीधे शिक्षा मंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी की गलियों तक पहुँचने वाला है। एक फरवरी को कोटा जिले का रामगंजमंडी क्षेत्र एक विशाल शिक्षक रैली का गवाह बनेगा, जहाँ हजारों की संख्या में शिक्षक अपनी मांगों और सरकार की कथित वादाखिलाफी के खिलाफ अपना रोष प्रकट करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें जयपुर में आयोजित संगठन के हालिया प्रांतीय शैक्षिक सम्मेलन और प्रदेश पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक में छिपी हैं। संगठन के प्रदेश महामंत्री नवीन कुमार शर्मा ने विभागीय कार्रवाई पर गहरा आश्चर्य जताते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और विवादित मामला है, जहाँ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं चलने के बावजूद बिना किसी आवेदन के हजारों प्रधानाचार्यों, उप प्रधानाचार्यों और व्याख्याताओं के तबादले कर दिए गए। परीक्षाओं के संवेदनशील समय में की गई इस कार्रवाई ने न केवल शैक्षणिक माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि शिक्षकों के भीतर असुरक्षा की भावना भी भर दी है।
शिक्षक संघ (सियाराम) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा के अनुसार, यह आंदोलन अचानक नहीं पनपा है बल्कि यह लंबे समय से जारी उपेक्षा का परिणाम है। संगठन की मांगों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद 29 अगस्त 2025 को शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय वार्ता हुई थी। उस वार्ता में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस क्रियान्विति नहीं हुई। संगठन के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि इन्हीं मुद्दों और शिक्षा मंत्री की कथित 'उदासीनता' ने शिक्षकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है, जिसकी परिणति अब रामगंजमंडी की सांकेतिक विरोध रैली के रूप में होने जा रही है।
संगठन के मुख्य महामंत्री व प्रदेश संघर्ष समिति के संयोजक उम्मेद सिंह डूडी ने मांगों का विस्तृत खाका पेश करते हुए बताया कि उनकी प्राथमिकता एक पारदर्शी व स्थाई स्थानांतरण नीति लागू करना है, जिससे तृतीय श्रेणी शिक्षकों सहित सभी कैडर के तबादले सुचारू हो सकें। इसके साथ ही, अतिरिक्त विषय के साथ स्नातक करने वाले तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति का मामला सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पैरवी करने, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त करने, और पीईईओ व यूसीईईओ को कार्यभार के अनुरूप अतिरिक्त स्टाफ व 10 प्रतिशत हार्ड ड्यूटी भत्ता देने जैसी मांगें प्रमुख हैं। संगठन ने कंप्यूटर अनुदेशकों, व्यावसायिक प्रशिक्षकों, विशेष शिक्षकों की मांगों और बकाया डीपीसी को लेकर भी मोर्चा खोल दिया है।
इस विशाल आंदोलन को सफल बनाने के लिए संगठन के मुख्य संरक्षक एवं प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा, सभाध्यक्ष ललित आर पाटीदार, उप सभाध्यक्ष मुकेश कुमार गौतम, कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल मीणा, महिला प्रदेशाध्यक्ष मीना मंसूरिया, संगठन महामंत्री प्रवीण गौड़ और प्रदेश उपाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार राठौड़ ने संयुक्त रूप से राज्य के सभी शिक्षकों से अपील की है। यह रैली केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि राजस्थान की शिक्षा नीति और शिक्षक हितों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश है, जो यह तय करेगा कि आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में जाएगी।

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