जयपुर: सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य चेतावनी, 31 जनवरी तक अचल संपत्ति का विवरण देना हुआ लाजमी
जयपुर: राजस्थान सरकार ने सभी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2025 का अचल संपत्ति विवरण (IPR) 31 जनवरी तक पोर्टल पर भरना अनिवार्य कर दिया है। कार्मिक विभाग की सचिव अर्चना सिंह ने चेतावनी दी है कि विवरण न देने पर वेतन वृद्धि रोकने और विजिलेंस क्लीयरेंस न देने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। जानें पूरी रिपोर्ट और ऑनलाइन प्रक्रिया की अंतिम तिथि।

जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में नए साल की शुरुआत के साथ ही राजकीय सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में बढ़ते कदमों के तहत अब संपत्ति का ब्यौरा देना महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की सेवाओं के लिए एक अनिवार्य शर्त होगी। जयपुर से जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सभी बोर्ड, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों के प्रत्येक सरकारी सेवक को वर्ष 2025 के लिए अपनी अचल संपत्ति का विवरण (IPR) अनिवार्य रूप से पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
प्रशासनिक सक्रियता को रेखांकित करते हुए कार्मिक विभाग की शासन सचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के समस्त कार्मिकों को 1 जनवरी से 31 जनवरी तक की समय सीमा के भीतर अपना विवरण एसएसओ (SSO) पोर्टल अथवा राजकाज़ 2.0 पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सबमिट करना होगा। यह प्रक्रिया न केवल शासन की कार्यप्रणाली को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की एक कड़ी है, बल्कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सार्वजनिक जीवन में शुचिता बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
इस घोषणा का सबसे गंभीर पहलू उन परिणामों से जुड़ा है जो विवरण न भरने की स्थिति में सामने आएंगे। श्रीमती अर्चना सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी कार्मिक इस निर्धारित अवधि के भीतर अपनी अचल संपत्ति की जानकारी साझा करने में विफल रहेगा, उसे विभाग की ओर से विजिलेंस क्लीयरेंस प्रदान नहीं की जाएगी। इतना ही नहीं, समय पर विवरण उपलब्ध न कराने वाले कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी जाएगी और उनकी पदोन्नति के मार्ग में भी गंभीर विभागीय बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। सरकार का यह सख्त रुख यह दर्शाता है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ विभाग अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है।
राजकीय सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही तय करने की इस कवायद ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के बीच हलचल तेज कर दी है। डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने का यह प्रयास शासन की उन नीतियों का हिस्सा है, जहां तकनीक और नियम मिलकर एक स्वच्छ और पारदर्शी कार्यसंस्कृति का निर्माण कर रहे हैं। 31 जनवरी की समय सीमा अब उन सभी के लिए एक निर्णायक तारीख बन गई है जो राजस्थान सरकार के साथ मिलकर प्रदेश की सेवा में कार्यरत हैं।

Pratahkal Bureau
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