जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रशासन की कथित दमनकारी नीतियों और पत्रकार की आजीविका पर चलाए गए बुलडोजर के विरुद्ध आक्रोश की ज्वाला धधक रही है। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) संगठन द्वारा झूठे मुकदमों और अन्यायपूर्ण कार्रवाई के विरोध में शुरू किया गया धरना आज अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। सरकार की अनदेखी के चलते लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार पिछले पांच दिनों से भीषण गर्मी, उमस और मच्छरों के प्रकोप के बीच सड़कों पर रातें गुजारने को विवश हैं। आलम यह है कि प्रदर्शनकारी पत्रकारों को सड़क पर ही सोने और भोजन करने के साथ-साथ अपनी दैनिक क्रियाओं व नहाने-धोने के लिए सुलभ कॉम्प्लेक्स जैसी सार्वजनिक सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

सरकार की इस कथित निष्ठुरता और पत्रकारों के प्रति संवेदनहीनता को लेकर संगठन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। धरने पर बैठे प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि राजस्थान प्रदेश का पत्रकार समुदाय अपने इस अपमान और शासन की उदासीनता को कभी विस्मृत नहीं करेगा। पत्रकारों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र ही इस प्रकरण में कोई न्यायोचित और संतुष्टिप्रद समाधान नहीं निकाला, तो इस आंदोलन का उग्र हश्र पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा। सरकार के विरुद्ध उपजा यह असंतोष अब एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होना तय है।

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