हिंडौन सिटी में गूंजा जय श्री राम: सीता स्वयंवर और राम विवाह के प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर
हिंडौन सिटी के शिवालय मंदिर के पास आयोजित रामकथा में आचार्य पुष्प मुरारी बापू ने सीता स्वयंवर और राम विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया। पिनाक धनुष टूटने और प्रभु राम के विवाह प्रसंग पर भक्त भावविभोर होकर नाचने लगे। इस विशेष आयोजन में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और कन्यादान के महत्व को समझा। पूरी खबर पढ़ें।

हिंडौन सिटी। भक्ति और श्रद्धा की त्रिवेणी में सराबोर हिंडौन सिटी इन दिनों मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शों से महक रही है। स्थानीय शिवालय मंदिर के समीप स्थित पार्क में आयोजित भव्य रामकथा के दौरान उस समय वातावरण अलौकिक हो उठा, जब कथा वाचक आचार्य पुष्प मुरारी बापू महाराज ने प्रभु श्री राम और माता सीता के मंगल विवाह का प्रसंग सुनाया। इस पावन अवसर पर समूचा पांडाल राममय हो गया और श्रद्धालु भक्ति के सागर में गोते लगाने लगे।
कथा के प्रवाह को गति देते हुए आचार्य पुष्प मुरारी बापू ने सबसे पहले मुनि विश्वामित्र के साथ भगवान श्री राम और लक्ष्मण के जनकपुरी आगमन का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजा जनक ने तीनों का आत्मीय अभिनंदन किया और इसके पश्चात राम-लक्ष्मण ने जनकपुरी की भव्यता का अवलोकन किया। इस दौरान लक्ष्मण द्वारा अपने अग्रज श्री राम की सेवा के समर्पण भाव ने श्रोताओं के हृदय को स्पर्श कर लिया।
कथा का मुख्य केंद्र बिंदु सीता स्वयंवर रहा। महाराज ने वर्णन किया कि जब बड़े-बड़े प्रतापी राजा और महाराजा शिव के 'पिनाक' धनुष को तिल भर भी हिलाने में असमर्थ रहे, तो राजा जनक अत्यंत दुखी और व्याकुल हो उठे। उनकी निराशा को देख मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्री राम ने जैसे ही धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाई, वह क्षण भर में ही टूट गया। धनुष टूटने की टंकार के साथ ही चारों ओर उल्लास छा गया। इसके उपरांत राम और सीता के विवाह की रस्मों का सजीव वर्णन सुनकर पांडाल में उपस्थित महिला और पुरुष भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।
भक्तों ने इस आध्यात्मिक विवाह महोत्सव को उत्सव के रूप में मनाया। महिलाओं ने सुमधुर भजनों पर नृत्य कर अपनी खुशी का इजहार किया। विशेष रूप से, कथा के दौरान 'कन्यादान' के प्रसंग को लेकर भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया, जिसे समाज में एक पुण्य कार्य के रूप में सराहा गया। इस धार्मिक आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों की आस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि मर्यादा और सेवा के मूल्यों को भी जन-जन तक पहुँचाया है।

Pratahkal Bureau
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